बारिश के अभाव में सूख रही फसलें, पशुचारे और पानी का संकट गहराया, किसानाें ने लगाई मदद की गुहार

बारिश के अभाव में सूख रही फसलें, पशुचारे और पानी का संकट गहराया, किसानाें ने लगाई मदद की गुहार

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के निपानी गांव में बारिश की कमी से फसलें सूखने लगी हैं. गांव में दो से तीन महीने से पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेती और पशुपालन संकट भी में हैं. किसानों ने फसल सर्वेक्षण, पंचनामा और आर्थिक सहायता की मांग की है.

nipani village farmer appa bandunipani village farmer appa bandu
क‍िसान तक
  • छत्रपति संभाजीनगर,
  • Sep 14, 2026,
  • Updated Sep 14, 2026, 10:09 AM IST

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पिछले दो से तीन महीनों से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं. कई फसलें अब बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं. खेती के साथ-साथ मवेशियों के लिए चारे और पानी की व्यवस्था करना भी किसानों के लिए चुनौती बन गया है. निपानी गांव के किसानों का कहना है कि फसल बचाने की कोशिश में खर्च बढ़ता जा रहा है, जबकि आमदनी की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है.

मक्का की फसल खराब होने से चारे का संकट

निपानी गांव के किसान अप्पा बंडू भलेकर के पास करीब 15 एकड़ खेती है और वह लगभग 25 मवेशि‍यों को पाल रहे है. उन्होंने अपने मवेशियों के चारे की जरूरत पूरी करने के लिए मक्का की फसल लगाई थी. लेकिन, बारिश नहीं होने के कारण खेत में खड़ी मक्का की फसल खराब होने लगी है. किसान ने कहा कि फसल पर अब तक 30 हजार रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं. इस खेती के लिए उन्होंने बैंक से कर्ज भी लिया है.

बैंक का कर्ज चुकाने की चुनौती

किसान अप्‍पा बंडू भलेकर का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिल पाने से भी खेती प्रभावित हुई. इसके बाद बारिश नहीं होने के कारण फसल को बचाना और मुश्किल हो गया है. उन्हें आशंका है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है. ऐसे में खेती में लगाया गया पैसा डूबने के साथ बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता भी बढ़ रही है.

अप्पा बंडू भलेकर ने बताया कि जब किसानों के पास खुद के खाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं बचेगा, तो वे अपने मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था कैसे करेंगे. पोला पर्व के दौरान भी किसानों को मवेशियों के लिए पानी उपलब्ध कराने में परेशानी का सामना करना पड़ा.

पाइपलाइन टूटने से सिंचाई व्यवस्था प्रभावित

निपानी गांव के किसान सुभाष पाठाडे ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण फसलों पर कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है. उनके खेत तक पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचता था, लेकिन रास्ते के काम के दौरान पाइपलाइन टूट गई. इसके बाद खेत में पानी पहुंचना बंद हो गया. बारिश के अभाव और सिंचाई व्यवस्था बाधित होने के कारण फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है.

सुभाष पाठाडे ने कहा कि एक एकड़ फसल तैयार करने में करीब 25 हजार रुपये तक का खर्च आता है. उन्होंने अपनी खेती के लिए लगभग पांच लाख रुपये का कर्ज लिया है. अगर फसल खराब होती है तो इस कर्ज को चुकाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा. उनका कहना है कि खेती में लगातार बढ़ते खर्च और फसल खराब होने के खतरे ने किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है.

कर्जमाफी और महंगाई को लेकर किसानों में नाराजगी

सुभाष पाठाडे ने आरोप लगाया कि सरकार कर्जमाफी के नाम पर किसानों की KYC करवा रही है, लेकिन उन्हें वास्तविक कर्जमाफी का लाभ नहीं मिल रहा है. उनका कहना है कि एक ओर किसान बारिश की कमी और फसल खराब होने से परेशान हैं, वहीं, दूसरी ओर महंगाई बढ़ने से खेती और घरेलू खर्च का बोझ भी बढ़ रहा है. ऐसे हालात में किसानों के लिए पुराने कर्ज की किस्तें चुकाना और अगली फसल की तैयारी करना कठिन हो गया है.

निपानी गांव के किसानों ने सरकार से बारिश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए खेतों में खड़ी फसलों का तत्काल सर्वेक्षण कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि नुकसान का पंचनामा तैयार कर प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए. (इसरारुद्दीन चिश्‍ती की रिपोर्ट)

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