
मध्य प्रदेश में 9 अप्रैल से पहले चरण की गेहूं खरीदी प्रक्रिया के बाद आज से शेष बचे डिविजन में दूसरे चरण की खरीद शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने रबी मार्कटिंग वर्ष 2026-27 के तहत किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की प्रक्रिया को तेज करते हुए व्यवस्थाओं को और मजबूत किया है. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मंगलवार को जानकारी दी कि अब तक 28 हजार 199 किसानों से 12 लाख 52 हजार 470 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है.
गेहूं बेचने वाले किसानों के खातों में 10 करोड़ 23 लाख रुपये का भुगतान भी ट्रांसफर किया गया है. निजी बाजार के मुकाबले बड़ी संख्या में अपनी उपज बेचने के लिए आगे आ रहे हैं. प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से खरीदी शुरू हो चुकी थी, जबकि अन्य संभागों में 15 अप्रैल से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
राज्य सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अब तक 2 लाख 35 हजार 177 किसानों ने 1 करोड़ 3 लाख 90 हजार 280 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक कराए हैं. इस बार की खरीदी को लेकर किसानों में अच्छी खासी सक्रियता देखने को मिल रही है. वहीं, खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए प्रदेशभर में 3171 खरीद केंद्र बनाए गए हैं.
इन केंद्रों पर किसानों के लिए बैठने की व्यवस्था, पेयजल, छाया, तौल कांटे, बारदाना, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. साथ ही गुणवत्ता जांच और साफ-सफाई के उपकरण भी रखे गए हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
इस वर्ष सरकार 2585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देकर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है. खरीदे गए गेहूं के सुरक्षित भंडारण और परिवहन की भी पूरी व्यवस्था की गई है. अब तक 7 लाख 69 हजार 720 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है.
गौरतलब है कि इस बार प्रदेश में रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष से 3 लाख 60 हजार अधिक है. पिछले साल करीब 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया गया है.