
मध्य प्रदेश में 9 अप्रैल से भोपाल सहित कई डिविजन में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू हो चुकी है. इस बार किसानों को केंद्र सरकार के निर्धारित MSP 2585 रुपए प्रति क्विंटल के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपए बोनस दिया जा रहा है, जिससे कुल कीमत 2625 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गई है. बढ़े हुए दाम के साथ शुरू हुई खरीदी ने किसानों को बाजार की तुलना में बेहतर विकल्प दिया है. भोपाल के कोलूखेड़ी स्थित उदाराम असवानी वेयरहाउस में खरीद शुरू होते ही आसपास के गांवों कजलास और भौंरी से किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे. यहां पहुंचने वाले किसानों ने न केवल कीमत बल्कि व्यवस्थाओं को लेकर भी संतोष जताया. केंद्र पर तौल, स्टैकिंग और इंतजार कर रहे किसानों के लिए बैठने की व्यवस्था ने प्रक्रिया को आसान बनाया है.
बरखेड़ा के किसान रामस्वरूप मेवाड़ा शुक्रवार को लगभग 49.5 क्विंटल गेहूं लेकर केंद्र पहुंचे. उन्होंने बताया कि 2625 रुपए प्रति क्विंटल का तय सरकारी रेट मंडी के मुकाबले काफी बेहतर है, जहां कुछ दिन पहले गेहूं 2200 से 2300 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था. उन्होंने कहा कि केंद्र पर तौल और भंडारण की व्यवस्था व्यवस्थित है. साथ ही किसानों के लिए टेंट, कुर्सियां और मटकों में ठंडा पानी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे इंतजार करना आसान हो गया है.
भौंरी गांव से आए एक किसान ने बताया कि वह करीब 40-45 क्विंटल गेहूं लेकर पहुंचे हैं और इस बार की व्यवस्थाएं पहले से बेहतर हैं. उन्होंने कहा कि तौल व्यवस्था में सुधार हुआ है और किसानों को अच्छी कीमत मिल रही है. हालांकि, खरीद प्रक्रिया में थोड़ी देरी जरूर है, लेकिन सुविधा पहले से बेहतर है. उन्होंने यह भी बताया कि पहले खरीदी सोसायटी स्तर पर होती थी, जबकि इस बार केंद्र पर व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित है.
बकानिया गांव के किसान मनोहर, जो करीब 50 क्विंटल गेहूं लेकर पहुंचे, उन्होंने भी केंद्र की व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताया. उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा दोनों में सुधार दिख रहा है.
वेयरहाउस संचालक रवि कुमार असवानी ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार यहां दो सोसायटी- कजलास और भौंरी के किसानों से खरीदी की जा रही है. उन्होंने कहा कि वेयरहाउस की कुल भंडारण क्षमता करीब 10 हजार मीट्रिक टन है, जिसमें से थोड़ा हिस्सा चावल से भरा है और बाकी गेहूं के लिए खाली रखा गया है. सुबह से लगातार किसान पहुंच रहे हैं और शाम तक करीब 200 ट्रॉली आने की उम्मीद है.
उन्होंने यह भी बताया कि छोटे किसानों को प्राथमिकता देते हुए पहले उनके स्लॉट तय किए गए हैं, जबकि अन्य किसानों की खरीदी क्रमशः की जाएगी. इस बार MSP पर बोनस और केंद्रों पर बेहतर व्यवस्थाओं ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है. मंडी के मुकाबले ज्यादा दाम और व्यवस्थित प्रक्रिया के कारण किसान सीधे खरीदी केंद्रों का रुख कर रहे हैं, जिससे सरकारी खरीद व्यवस्था को भी मजबूती मिलती दिख रही है. (एएनआई)