Wheat Procurement: गुणवत्ता में फेल पंजाब, थमी गेहूं खरीद की रफ्तार, किसानों की बढ़ी चिंता

Wheat Procurement: गुणवत्ता में फेल पंजाब, थमी गेहूं खरीद की रफ्तार, किसानों की बढ़ी चिंता

पंजाब में गेहूं की खरीद धीमी पड़ गई है क्योंकि बारिश और गर्मी से खराब हुई फसल गुणवत्ता जांच में फेल हो रही है. मंडियों में किसान कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही. MSP पर बिक्री भी मुश्किल हो गई है. किसान नियमों में ढील की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें राहत मिल सके.

पंजाब का गेहूं गुणवत्ता परीक्षण में फेलपंजाब का गेहूं गुणवत्ता परीक्षण में फेल
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 15, 2026,
  • Updated Apr 15, 2026, 9:20 AM IST

पंजाब के कई मंडियों में इस समय गेहूं की खरीद बहुत धीमी चल रही है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि किसानों का गेहूं गुणवत्ता जांच में फेल हो रहा है. बारिश और अचानक बढ़ी गर्मी के कारण गेहूं के दाने छोटे, सिकुड़े हुए और खराब हो गए हैं. सरकार गेहूं खरीदने के लिए कुछ नियम बनाती है, जिन्हें पूरा करना जरूरी होता है. लेकिन इस बार कई किसानों का गेहूं इन नियमों पर खरा नहीं उतर पा रहा है, इसलिए खरीद रुक गई है.

मंडी में फंसे किसान, बढ़ रही परेशानी

संगरूर जिले के एक किसान सतनाम सिंह बताते हैं कि वे पिछले छह दिनों से अपनी 15 ट्रॉलियों के साथ मंडी में खड़े हैं, लेकिन उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि गेहूं के दाने ठीक नहीं हैं. किसान कहते हैं कि इसमें उनकी गलती नहीं है, क्योंकि मौसम खराब होने से फसल प्रभावित हुई है. वे मांग कर रहे हैं कि सरकार नियमों में थोड़ी ढील दे, ताकि उनका गेहूं खरीदा जा सके.

गेहूं की गुणवत्ता पर क्या हैं नियम?

सरकार गेहूं खरीदते समय कुछ खास बातों को देखती है, जैसे दानों में नमी कितनी है, उनका रंग कैसा है, दाने बड़े हैं या छोटे, और कहीं उनमें खराबी तो नहीं है. अगर गेहूं इन बातों में सही नहीं होता, तो उसे खरीदने से मना कर दिया जाता है. इस बार बारिश और गर्मी के कारण गेहूं में नमी ज्यादा रही और दाने कमजोर हो गए, जिससे वह जांच में फेल हो गया.

MSP पर नहीं बिक पा रहा गेहूं

सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. किसान चाहते हैं कि उनका गेहूं इसी दाम पर बिके. लेकिन जब सरकारी एजेंसियां खरीद नहीं कर रही हैं, तो किसानों को मजबूरी में कम दाम पर बेचने का डर सता रहा है. किसानों का कहना है कि उनकी “उम्मीदों की फसल” मंडी में पड़ी है, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं.

कुछ जगह खरीद में थोड़ी तेजी

खन्ना इलाके में आढ़ती संघ के एक नेता ने बताया कि पहले गेहूं में नमी ज्यादा थी, लेकिन अब मौसम सूखा हो गया है, जिससे नमी कम हो रही है. इसी कारण कुछ जगहों पर अब खरीद थोड़ी तेज होने लगी है. मंडियों में रोज लाखों टन गेहूं आ रहा है, लेकिन उसकी तुलना में खरीद बहुत कम हो रही है.

आंकड़े क्या बताते हैं?

अब तक मंडियों में करीब 4 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन उसमें से केवल करीब 80 हजार मीट्रिक टन ही खरीदा गया है. यानी कुल गेहूं का सिर्फ 20 प्रतिशत ही खरीदा गया है. इससे साफ पता चलता है कि खरीद की रफ्तार बहुत धीमी है और किसान परेशान हैं.

किसानों का गुस्सा और मांग

किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को जल्दी से नियमों में बदलाव करना चाहिए. उनका आरोप है कि देरी जानबूझकर की जा रही है ताकि निजी कंपनियां कम दाम पर गेहूं खरीद सकें. किसानों का कहना है कि उन्हें बिना वजह परेशान किया जा रहा है और सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए.

सरकार से क्या उम्मीद है?

किसान चाहते हैं कि सरकार जल्दी फैसला लेकर गुणवत्ता के नियमों में ढील दे. अगर ऐसा होता है, तो मंडियों में रुका हुआ गेहूं खरीदा जा सकेगा और किसानों को राहत मिलेगी. अभी सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है.

पंजाब में इस बार गेहूं की फसल मौसम की मार से कमजोर हो गई है. इसी कारण किसान अपनी फसल बेच नहीं पा रहे हैं. अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है. ऐसे में जरूरी है कि सरकार और अधिकारी मिलकर जल्द से जल्द किसानों की समस्या का हल निकालें, ताकि उनकी मेहनत बेकार न जाए.

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