
पंजाब के कई मंडियों में इस समय गेहूं की खरीद बहुत धीमी चल रही है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि किसानों का गेहूं गुणवत्ता जांच में फेल हो रहा है. बारिश और अचानक बढ़ी गर्मी के कारण गेहूं के दाने छोटे, सिकुड़े हुए और खराब हो गए हैं. सरकार गेहूं खरीदने के लिए कुछ नियम बनाती है, जिन्हें पूरा करना जरूरी होता है. लेकिन इस बार कई किसानों का गेहूं इन नियमों पर खरा नहीं उतर पा रहा है, इसलिए खरीद रुक गई है.
संगरूर जिले के एक किसान सतनाम सिंह बताते हैं कि वे पिछले छह दिनों से अपनी 15 ट्रॉलियों के साथ मंडी में खड़े हैं, लेकिन उनका गेहूं नहीं खरीदा जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि गेहूं के दाने ठीक नहीं हैं. किसान कहते हैं कि इसमें उनकी गलती नहीं है, क्योंकि मौसम खराब होने से फसल प्रभावित हुई है. वे मांग कर रहे हैं कि सरकार नियमों में थोड़ी ढील दे, ताकि उनका गेहूं खरीदा जा सके.
सरकार गेहूं खरीदते समय कुछ खास बातों को देखती है, जैसे दानों में नमी कितनी है, उनका रंग कैसा है, दाने बड़े हैं या छोटे, और कहीं उनमें खराबी तो नहीं है. अगर गेहूं इन बातों में सही नहीं होता, तो उसे खरीदने से मना कर दिया जाता है. इस बार बारिश और गर्मी के कारण गेहूं में नमी ज्यादा रही और दाने कमजोर हो गए, जिससे वह जांच में फेल हो गया.
सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. किसान चाहते हैं कि उनका गेहूं इसी दाम पर बिके. लेकिन जब सरकारी एजेंसियां खरीद नहीं कर रही हैं, तो किसानों को मजबूरी में कम दाम पर बेचने का डर सता रहा है. किसानों का कहना है कि उनकी “उम्मीदों की फसल” मंडी में पड़ी है, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं.
खन्ना इलाके में आढ़ती संघ के एक नेता ने बताया कि पहले गेहूं में नमी ज्यादा थी, लेकिन अब मौसम सूखा हो गया है, जिससे नमी कम हो रही है. इसी कारण कुछ जगहों पर अब खरीद थोड़ी तेज होने लगी है. मंडियों में रोज लाखों टन गेहूं आ रहा है, लेकिन उसकी तुलना में खरीद बहुत कम हो रही है.
अब तक मंडियों में करीब 4 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन उसमें से केवल करीब 80 हजार मीट्रिक टन ही खरीदा गया है. यानी कुल गेहूं का सिर्फ 20 प्रतिशत ही खरीदा गया है. इससे साफ पता चलता है कि खरीद की रफ्तार बहुत धीमी है और किसान परेशान हैं.
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को जल्दी से नियमों में बदलाव करना चाहिए. उनका आरोप है कि देरी जानबूझकर की जा रही है ताकि निजी कंपनियां कम दाम पर गेहूं खरीद सकें. किसानों का कहना है कि उन्हें बिना वजह परेशान किया जा रहा है और सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए.
किसान चाहते हैं कि सरकार जल्दी फैसला लेकर गुणवत्ता के नियमों में ढील दे. अगर ऐसा होता है, तो मंडियों में रुका हुआ गेहूं खरीदा जा सकेगा और किसानों को राहत मिलेगी. अभी सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है.
पंजाब में इस बार गेहूं की फसल मौसम की मार से कमजोर हो गई है. इसी कारण किसान अपनी फसल बेच नहीं पा रहे हैं. अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है. ऐसे में जरूरी है कि सरकार और अधिकारी मिलकर जल्द से जल्द किसानों की समस्या का हल निकालें, ताकि उनकी मेहनत बेकार न जाए.
ये भी पढ़ें:
खाद की बढ़ती कीमतों से कॉफी उत्पादन पर खतरा, कीमत बढ़ने की चिंता
UP: लखनऊ में आज से होगा 'Poultry Conclave' का आगाज, देशभर के वैज्ञानिक और एक्सपर्ट करेंगे मंथन