
देश में गर्मी सीजन की फसलों की बुवाई रफ्तार पकड़ रही है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 10 अप्रैल 2026 तक कुल 64.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल के इसी समय के 63.33 लाख हेक्टेयर से अधिक है. इस तरह कुल बुवाई क्षेत्र में 0.77 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
हालांकि, धान (चावल) के रकबे में इस बार गिरावट देखी गई है. चालू वर्ष में 30.59 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 32.30 लाख हेक्टेयर थी. यानी करीब 1.72 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.
इसके विपरीत दालों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है. इस साल अब तक 11.54 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हुई है, जो पिछले साल के 10.71 लाख हेक्टेयर से 0.83 लाख हेक्टेयर अधिक है. इसमें मूंग (ग्रीनग्राम) और उड़द (ब्लैकग्राम) दोनों फसलों का रकबा बढ़ा है.
मोटे अनाज (श्री अन्न) की बात करें तो इनका रकबा भी बढ़कर 13.67 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 12.70 लाख हेक्टेयर था. खासकर मक्का की बुवाई में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 8.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है.
तिलहनों की बुवाई भी इस साल बढ़ी है. अब तक 8.31 लाख हेक्टेयर में तिलहन की खेती हुई है, जो पिछले साल के 7.62 लाख हेक्टेयर से 0.69 लाख हेक्टेयर अधिक है. इसमें मूंगफली और सूरजमुखी के रकबे में खास बढ़ोतरी देखी गई है.
कुल मिलाकर, जहां धान का रकबा घटा है, वहीं दालों, मोटे अनाज और तिलहनों की बढ़ती बुवाई कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. यह बदलाव फसल विविधीकरण और पानी की बचत जैसे उद्देश्यों को भी बढ़ावा दे सकता है.
इससे पहले 3 अप्रैल को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में गर्मी (समर/जायद) फसलों की बुवाई का कुल रकबा 58.29 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था, जो पिछले साल की समान अवधि के 57.80 लाख हेक्टेयर से 0.48 लाख हेक्टेयर अधिक है.
गर्मी की फसलें, या जायद फसलें, मार्च और जून के बीच उगाई जाने वाली छोटी अवधि के पौधे हैं जो गर्मी में पनपते हैं और अधिक सिंचाई की जरूरत होती है. प्रमुख फसलों में बाजरा (बाजरा, ज्वार), दालें (मूंग, लोबिया), तिलहन (तिल), और सब्जियां (ककड़ी, तरबूज, लौकी) शामिल हैं. ये फसलें अधिक रिटर्न, तेजी से बढ़वार और बढ़ी हुई मिट्टी की उर्वरता देती हैं.