
देश के कई राज्यों में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य पंजाब है, जहां खेतों में खड़ी गेहूं की फसल भीग गई है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में भी मौसम की मार से किसानों की चिंता बढ़ गई है. बारिश के कारण गेहूं के दानों में नमी बढ़ने की आशंका है, जिससे सरकारी खरीद पर असर पड़ सकता है.
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के मौजूदा नियमों के अनुसार 14 प्रतिशत से अधिक नमी वाले गेहूं की खरीद नहीं की जाती है, जबकि 12 से 14 प्रतिशत नमी होने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में कटौती का प्रावधान है. ऐसे में अगर नमी का स्तर बढ़ता है तो सरकारी एजेंसियां गेहूं खरीदने से इनकार कर सकती हैं, जिससे किसानों को खुले बाजार में कम दामों पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
2022 में हीट स्ट्रेस बढ़ने और फसल के प्रभावित होने पर केंद्र सरकार ने गेहूं की उचित और औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) मानकों में बड़ी छूट दी थी. उस समय “सिकुड़े और टूटे हुए दानों” की अधिकतम सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था.
इसी तरह 2023 में कटाई के वक्त भारी बारिश के बाद केंद्र सरकार ने लस्टर लॉस यानी गेहूं की चमक कम होने के मामलों में बड़ी राहत दी थी. उस दौरान एजेंसियों को 80 प्रतिशत तक लस्टर लॉस वाले गेहूं की खरीद की अनुमति दी गई थी.
कई राज्यों में कमोबेस ऐसी ही हालत है जिसके बाद किसान केंद्र सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं. किसानों को भरोसा है कि इस बार की बारिश को देखते हुए सरकार गेहूं की नमी मात्रा जरूर छूट देगी.
2022 मार्च में इतनी गर्मी पड़ी, लू जैसी लहर चली कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में गेहूं के दाने कमजोर पड़ गए. दाने समय से पहले पक गए और छोटे रह गए. इसका सबसे बड़ा खतरा मंडियों में एमएसपी पर खरीद में देखा गया. किसानों की उपज मंडियों से लौटने लगी क्योंकि खरीदी तय मानक के अनुरूप नहीं हो पा रही थी.
एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई–जून) के दौरान कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों के चुनिंदा क्षेत्रों में लू का गंभीर प्रभाव पड़ा, जिसके कारण गेहूं उत्पादन में 18.4 लाख टन की कमी आ गई और कुल उत्पादन घटकर 10 करोड़ 77.4 लाख टन रह गया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गेहूं की सरकारी खरीद भी घटकर 1.9 करोड़ टन तक सिमट गई.
किसानों ने राहत के लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई. कुछ दिनों बाद सरकार की ओर से एफएक्यू मानदंडों में छूट की घोषणा की गई. सरकारी खरीद के लिए सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 6 परसेंट है जिसे बढ़ाकर 18 परसेंट किया गया. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि एफसीआई पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में केंद्रीय पूल के लिए गेहूं खरीदेगा जिसमें सूखे और टूटे अनाजों पर लगने वाले एक्स्ट्रा चार्ज में 18 परसेंट तक छूट दी जाएगी, वह भी बिना किसी मूल्य कटौती के. केंद्र के इस फैसले से किसानों को बड़ी राहत मिली क्योंकि सिकुड़े गेहूं की भी एमएसपी पर खरीद हुई. इतना ही नहीं, गेहूं खरीद की तारीख को 31 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया.
देश के अलग-अलग राज्यों में बेमौसम बारिश ने जिस तरह की तबाही मचाई है, वैसी तबाही 2023 में भी देखने को मिली थी. उस साल सरकार ने आशंका जताई कि खराब मौसम के कारण 10 से 20 लाख टन तक गेहूं का उत्पादन घट सकता है. फसल की सरकारी खरीद को लेकर किसानों में चिंता थी. किसान परेशान थे कि बारिश से गेहूं की चमक फीकी पड़ गई है, नमी की मात्रा भी अधिक है. कई जगह की मंडियों में खराब गेहूं की खरीद ठप रही. राज्यों के कृषि मंत्रियों ने केंद्र से खरीद नियमों में छूट देने की मांग उठाई.
उस समय केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कुछ राज्यों में गेहूं की सरकारी खरीद के मानकों में ढील दी. सरकार ने 80 प्रतिशत तक लस्टर लॉस वाले और 18 प्रतिशत तक सिकुड़े‑टूटे गेहूं की खरीद की अनुमति दे दी. निर्देशों में कहा गया, गेहूं की चमक में 10 प्रतिशत तक कमी होने पर खरीद मूल्य में कोई कटौती नहीं की जाएगी, जबकि इससे अधिक लस्टर लॉस की स्थिति में नियमानुसार मामूली कटौती लागू होगी.
इसी तरह, गेहूं के दानों में 6 प्रतिशत तक सिकुड़न या टूट-फूट होने पर कोई कटौती नहीं होगी और 18 प्रतिशत तक सिकुड़े‑टूटे दानों वाले गेहूं की खरीद पर केंद्र सरकार के नियमों के तहत मामूली कटौती की जाएगी. इससे किसानों को बड़ी राहत मिली और मंडियों में गेहूं की खरीद सुचारू ढंग से चली.
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान को लेकर जानकारी साझा की. उन्होंने शुक्रवार (10 अप्रैल) को बताया कि शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार लगभग 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं.
मंत्री ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए कि वे तुरंत नुकसान का आकलन शुरू करें. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नुकसान से संबंधित सूची गांव-गांव के पंचायत भवनों पर लगाई जाए, ताकि किसान उस पर आपत्ति दर्ज करा सकें या सुधार के लिए आवेदन दे सकें.
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत टीमें सक्रिय हैं. हालांकि, मौसम की मार अलग-अलग चरणों में पड़ने और आंकड़ों के लगातार अपडेट होने की वजह से फिलहाल कुल नुकसान का अंतिम आंकड़ा बताना संभव नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को राहत और बीमा का लाभ देने में किसी तरह की कमी नहीं रहने दी जाएगी.
कृषि मंत्री के इस आश्वासन के बाद किसानों के मन में सवाल है कि क्या सरकारी खरीद नियमों में छूट मिलेगी? क्या भीगे गेहूं भी सरकारी रेट पर बिक सकेंगे, क्या बदरंग गेहूं को भी एमएसपी का भाव मिल पाएगा?