
किसानों को उनकी फसलों का सही दाम दिलाने के मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट भी एक्टिव हो गया है. न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस याचिका में कहा गया है कि किसानों को उनकी फसल की पूरी लागत के हिसाब से MSP मिलना चाहिए, ताकि उन्हें सही फायदा मिल सके.
याचिका में मांग की गई है कि जब सरकार MSP तय करे, तो उसमें खेती की पूरी लागत को शामिल किया जाए. यानी बीज, खाद, पानी, मजदूरी और जमीन से जुड़ी हर लागत को ध्यान में रखा जाए. साथ ही यह भी कहा गया है कि जो किसान अपनी फसल MSP पर बेचना चाहते हैं, सरकार उनकी पूरी फसल खरीदे. इसके अलावा हर गांव, कस्बे और जिले में पर्याप्त सरकारी खरीद केंद्र बनाए जाएं, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए भटकना न पड़े.
याचिका में यह भी बताया गया है कि आज किसानों की हालत काफी मुश्किल हो गई है. कई किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं और उन्हें अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता. ऐसे में किसानों का कर्ज माफ करने की भी मांग की गई है, ताकि उन्हें राहत मिल सके. वकील प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा कि हर साल हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं. उनका कहना है कि MSP अक्सर फसल की लागत से कम होता है, जिससे किसान नुकसान में रहते हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि MSP लागत से कम से कम 50 प्रतिशत ज्यादा होना चाहिए.
एक बड़ी समस्या यह भी है कि MSP पर केवल कुछ ही फसलों की खरीद होती है, जैसे गेहूं और धान. बाकी फसलों के किसानों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता. इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ती है- एक तो लागत ज्यादा होती है और दूसरा सही दाम नहीं मिलता.
इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि MSP तय करना आसान नहीं है. इसमें कई तरह की गणनाएं करनी पड़ती हैं. जमीन और पूंजी की लागत हर राज्य और जिले में अलग-अलग होती है, इसलिए एक ही नियम पूरे देश पर लागू करना मुश्किल हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि सभी किसानों की स्थिति एक जैसी नहीं होती. कुछ किसानों के पास ज्यादा जमीन है, तो कुछ के पास बहुत कम. ऐसे में सभी के लिए एक जैसी नीति बनाना चुनौतीपूर्ण है.
प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि सरकार मुफ्त राशन दे रही है, जो अच्छी बात है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं होना चाहिए कि किसानों को उनकी लागत का भी पैसा न मिले. अगर किसान को सही दाम नहीं मिलेगा, तो उसकी आर्थिक स्थिति और खराब होगी. उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे देश की औसत लागत निकालकर उसी आधार पर MSP तय किया जाए, ताकि सभी किसानों को फायदा मिल सके.
अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखना होगा. इस मामले में आने वाला फैसला किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है. अगर MSP को लेकर नए नियम बनते हैं, तो इससे किसानों की आय और जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है. कुल मिलाकर, यह मामला किसानों के हक और उनकी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और अदालत इस मुद्दे पर क्या फैसला लेते हैं.
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