कीचड़ में उतरकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लगाया धान का रोपा, किसानों और महिलाओं के साथ साझा किया खेत का अनुभव

कीचड़ में उतरकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लगाया धान का रोपा, किसानों और महिलाओं के साथ साझा किया खेत का अनुभव

सिवनी के बबरिया गांव में आयोजित धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कीचड़ में उतरकर महिलाओं के साथ धान का रोपा लगाया. उन्होंने किसान परिवार के साथ आत्मीय संवाद किया, पारंपरिक 'सिदोरी' का स्वाद लिया और महिला किसानों के लिए सोलर पैनल लगाने के निर्देश भी दिए.

धर्मेंद्र सिंह
  • Bhopal ,
  • Jul 01, 2026,
  • Updated Jul 01, 2026, 9:08 PM IST

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक अलग और बेहद सहज रूप सोमवार को सिवनी जिले के ग्राम बबरिया में आयोजित धान महोत्सव के दौरान देखने को मिला. मुख्यमंत्री ने किसानों के बीच पहुंचकर केवल कार्यक्रम की औपचारिकता ही पूरी नहीं की, बल्कि कीचड़ से भरे धान के खेत में उतरकर महिलाओं के साथ पारंपरिक तरीके से धान का रोपा (परहा) लगाया. इस दौरान उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी परंपराओं को करीब से जाना और किसानों के साथ आत्मीय संवाद भी किया.

पहली बार किया धान की रोपाई का अनुभव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जब कृषक नाथूराम यादव के खेत पहुंचे तो उन्होंने बिना किसी संकोच के खेत में उतरकर धान की रोपाई शुरू कर दी. रोपाई के दौरान उनका कुर्ता, पायजामा और गमछा पूरी तरह कीचड़ से भर गया, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना महिलाओं के साथ मिलकर धान का रोपा लगाया.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके क्षेत्र में मुख्य रूप से सोयाबीन की खेती होती है, इसलिए उन्हें पहले कभी धान की रोपाई करने का अवसर नहीं मिला. उन्होंने कहा कि पहली बार धान का रोपा लगाने का अनुभव उनके लिए बेहद आनंददायक और यादगार रहा.

किसान परिवार से की आत्मीय मुलाकात

रोपाई के बाद मुख्यमंत्री ने कृषक नाथूराम यादव और उनके परिवार के सदस्यों से आत्मीयता के साथ मुलाकात की. उन्होंने किसान को गले लगाकर खेती-किसानी की जानकारी ली और परिवार के सदस्यों से भी बातचीत कर उनका हालचाल जाना.

पारंपरिक लोकगीतों ने बनाया माहौल यादगार

धान की रोपाई के दौरान महिला किसानों ने पारंपरिक लोकगीत "चंदन राजा को परहा गढ़ से, रानी सरुपा सकारी उठ से" गाकर पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया.मुख्यमंत्री ने इन लोकगीतों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे गीत किसानों की मेहनत को उत्सव में बदल देते हैं और श्रम की थकान को भी कम कर देते हैं.

महिलाओं से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अगली बार वे अपनी पत्नी को भी साथ लेकर आएंगे, ताकि वे भी इस गौरवशाली ग्रामीण परंपरा का अनुभव कर सकें.

किसान की सिदोरी का लिया स्वाद

धान की रोपाई के बाद बरघाट के ग्राम लोहारा से आए किसान दौलतराम बिसेन ने मुख्यमंत्री से अपने घर से लाई गई पारंपरिक 'सिदोरी' खाने का आग्रह किया.मुख्यमंत्री ने किसान का निमंत्रण सहर्ष स्वीकार किया और खेत में ही रोटी, गुड़ तथा अचार का स्वाद लिया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के घर का सादा भोजन आत्मीयता और मेहनत की मिठास से भरा होता है. उन्होंने किसान परिवार का आभार व्यक्त करते हुए ग्रामीण जीवन की सादगी की सराहना की.

प्रकृति पूजन के साथ विकास का संदेश

धान रोपाई से पहले मुख्यमंत्री ने प्रकृति, देवी-देवताओं और गौमाता का पूजन किया तथा खेत की मेड़ पर आम का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया.

महिला किसानों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनके परिवार और बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य की जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को पात्र परिवारों के घरों में सोलर पैनल लगाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए.

किसानों के बीच मुख्यमंत्री का सहज अंदाज 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का खेत में उतरकर किसानों के साथ काम करना, पारंपरिक भोजन ग्रहण करना और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ाव दिखाना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा.उनके इस व्यवहार ने किसानों और ग्रामीणों के बीच आत्मीयता का संदेश दिया तथा खेती-किसानी और ग्रामीण परंपराओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी रेखांकित किया.

ये रहे उपस्थित

कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद भारती पारधी, जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मीना बिसेन, विधायक दिनेश राय, विधायक कमल मर्सकोले, कमिश्नर धनंजय सिंह, कलेक्टर नेहा मीना, पुलिस अधीक्षक कृष्णलालचंदानी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे.

 

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