49 मन प्रति एकड़ तक उपज दे सकती है यह बाजरा किस्म, हरियाणा के बाद अब दूसरे राज्यों में भी मिलेगी

49 मन प्रति एकड़ तक उपज दे सकती है यह बाजरा किस्म, हरियाणा के बाद अब दूसरे राज्यों में भी मिलेगी

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की उन्नत बाजरा किस्में एचएचबी-299 और एचएचबी-67 संशोधित-2 अब अन्य राज्यों में भी उपलब्ध होंगी. ये किस्में अधिक उपज, जोगिया रोग प्रतिरोधक क्षमता, बेहतर पोषण और सूखा सहनशीलता के लिए जानी जाती हैं.

Pearl Millet Hybrid VarietiesPearl Millet Hybrid Varieties
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 29, 2026,
  • Updated Jul 29, 2026, 1:45 PM IST

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने बाजरे की उन्नत हाइब्रिड किस्में तैयार की हैं. इन बाजरा किस्मों में एचएचबी-299 और एचएचबी-67 संशोधित-2 शामिल हैं.  इन उन्नत किस्मों के बीज अब हरियाणा से निकलकर दूसरे राज्यों में बिकेंगे क्योंकि यूनिवर्सिटी ने इसके लिए बीज कंपनियों से समझौते किए हैं. इसमें एक कंपनी आंध्र प्रदेश के कुरनूल की चक्रा सीड्स है. यह कंपनी बाजरे की उन्नत किस्मों के बीज आंध्र प्रदेश में बेचने का काम करेगी. बाजरे की ये किस्में अधिक उपज देने वाली, रोगों के लिए प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूल हैं.

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में तैयार बाजरे की ये किस्में हरियाणा के साथ-साथ देश के अनेक राज्यों में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. विश्वविद्यालय का कहना है कि उसका मकसद बाजरे के क्वालिटी वाले बीज किसानों तक समय पर उपलब्ध कराकर कम लागत में अधिक उत्पादन दिलाना है. प्राइवेट बीज कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग से इन किस्मों का अधिक से अधिक प्रसार संभव होगा, जिससे बड़ी तादाद में किसान लाभान्वित होंगे.

बाजरा किस्मों की खासियत

बाजरे की एचएचबी 299 किस्म में अन्य किस्मों की तुलना में अधिक पैदावार मिलती है और यह रोगरोधी भी है. यह बाजरा की अधिक आयरन से भरपूर (73 पी.पी.एम.) हाइब्रिड किस्म है. इसके सिट्टे शंक्वाकार और मध्यम लंबे होते हैं. एचएचबी 299 किस्म 80-82 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. अच्छा रख रखाव करने पर यह किस्म 49.0 मन प्रति एकड़ तक पैदावार देने की क्षमता रखती है. यह किस्म जोगिया रोगरोधी है.

क्या है बाजरे का जोगिया रोग

बाजरे का जोगिया रोग (जिसे हरित बाली रोग या डाउनी मिल्ड्यू भी कहते हैं) एक खतरनाक कवक जनित बीमारी है. इसके मुख्य लक्षण पौधे का बौना होना, पत्तियों पर पीलापन और सफेद पाउडर दिखना और बालियों का घास जैसी हरी पत्तियों में बदलना है. रोग के लक्षण की बात करें तो बाजरे के प्रभावित पौधे छोटे और कमजोर रह जाते हैं. पत्तियों की निचली सतह पर सफेद चूर्ण जैसा फफूंद दिखता है. बालियों की जगह हरी-हरी पत्तियां या घास जैसी रचना बन जाती है.

एचएचबी 67-2 किस्म 

बाजरे की यह उन्नत किस्म पहले वाली किस्म एचएचबी 67 संशोधित का जोगिया रोग प्रतिरोधी वैरायटी है. यह हाइब्रिड किस्म हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के बारानी क्षेत्रों में आम खेती के लिए 2021 में सिफारिश की गई थी. एचएचबी-67 संशोधित के नर जनक एच 77/833-2-202 को जोगिया रोग प्रतिरोधी बनाया गया है. इस नई विकसित संकर किस्म एचएचबी-67 संशोधित-2 में एचएचबी 67 संशोधित के सभी गुण जैसे बहुत जल्द पकना, सूखे का कम असर, दाने और चारे की अच्छी क्वालिटी, अगेती, मध्यम और पछेती बुवाई के लिए उपयुक्त आदि शामिल हैं. इसके दाने और सूखे चारे की औसत उपज क्रमश: 20 मन और 52 मन प्रति एकड़ है. यह नई संशोधित संकर किस्म बेहतर प्रबंधन से और भी अच्छे रिजल्ट देती है और बाजरा की अन्य बीमारियों के लिए रोगरोधी है.

अन्य उन्नत किस्मों की बात करें तो इसमें आरएचबी 234, जीएचबी 538 और पूसा 605 है. आरएचबी 234 किस्म 80 से 81 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसकी औसत उपज लगभग 30 से 31 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है और यह हरित बाली रोग प्रतिरोधी है. जीएचबी 538 70 से 75 दिनों में पकने वाली किस्म है. इसकी ऊंचाई 155 से 165 सेमी होती है और इससे 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दाने की उपज मिल जाती है. पूसा 605 75 से 80 दिनों में पकती है और कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है.

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