हरियाणा में बारिश बनी किसानों की मुसीबत, खेतों में बिछी धान की फसल, 40% तक नुकसान का दावा

हरियाणा में बारिश बनी किसानों की मुसीबत, खेतों में बिछी धान की फसल, 40% तक नुकसान का दावा

हरियाणा के करनाल में बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कटाई के लिए तैयार धान की फसल कई जगह खेतों में गिर गई है. किसानों का दावा है कि इससे 35 से 40 फीसदी तक नुकसान हुआ है और उत्पादन के साथ क्वालिटी पर भी असर पड़ सकता है.

karnal paddy cropkarnal paddy crop
कमलदीप
  • करनाल,
  • Sep 07, 2026,
  • Updated Sep 07, 2026, 2:31 PM IST

हरियाणा के करनाल में धान की पककर तैयार हो रही फसल पर बेमौसम बारिश और तेज हवाओं की मार पड़ गई है. खेतों में खड़ी धान की फसल कई जगह जमीन पर बिछ गई है, जिससे किसान चिंतित हैं. किसानों का कहना है कि जिस समय फसल को बारिश की जरूरत थी, उस दौरान पर्याप्त बारिश नहीं हुई, लेकिन अब कटाई से ठीक पहले हुई बारिश नुकसान का कारण बन रही है.

करनाल के किसान ईशम सिंह ने बताया कि वह पिछले करीब 50 वर्षों से खेती कर रहे हैं और इस बार उन्होंने 9 किले में धान की खेती की है. उनके अनुसार जून, जुलाई और अगस्त में जिस बारिश की जरूरत थी, वह नहीं हुई. अब सितंबर में लगातार बारिश होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

बारिश और तेज हवा से धान का नुकसान

ईशम सिंह का दावा है कि बारिश और तेज हवाओं के कारण उनकी फसल को 35 से 40 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है. उन्होंने बताया कि धान की फसल लगभग पक चुकी थी. तेज हवा के चलते फसल खेतों में गिर गई है और जो बालियां पककर नीचे झुक गई हैं, उनकी क्वालिटी प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.

किसान का कहना है कि इस समय किसानों को बारिश की बिल्कुल जरूरत नहीं थी. धान की फसल कटाई के लिए तैयार खड़ी है, लेकिन लगातार बारिश के कारण खेतों में मशीनें नहीं चल पा रही हैं. इससे कटाई का काम प्रभावित हो रहा है और किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है.

ईशम सिंह ने खेती की बढ़ती लागत को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि खेती में बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है. इसके बावजूद किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता. उनका आरोप है कि मंडियों में व्यापारी फसल की क्वालिटी के नाम पर कटौती करते हैं, जिससे किसानों की आमदनी और कम हो जाती है.

बेमौसम बारिश से धान को तगड़ी मार

वहीं करनाल के ही किसान सुमित ने कहा कि इस समय हो रही बारिश का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि अधिकांश किसानों की धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है. उन्होंने बताया कि बारिश के कारण धान का दाना काला पड़ने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मंडी में बेहतर भाव मिलने में दिक्कत आती है.

सुमित के अनुसार जब पकी हुई फसल खेतों में गिर जाती है तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में जितनी पैदावार मिलने की उम्मीद होती है, उससे कम उत्पादन मिलता है. इससे किसानों को दोहरा नुकसान होता है, एक तरफ उपज घटती है और दूसरी तरफ क्वालिटी प्रभावित होती है.

किसानों का कहना है कि यह समस्या लगभग हर साल देखने को मिलती है. जब फसल कटाई के करीब पहुंचती है, उसी समय बारिश होने से नुकसान बढ़ जाता है. फिलहाल करनाल के किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि कटाई का काम शुरू हो सके और नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके.

किसानों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम फिर खराब होता है तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है. ऐसे में उनकी नजर अब मौसम की अगली चाल और प्रशासन की ओर से मिलने वाली संभावित राहत पर टिकी हुई है.

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