Fisheries Tips: मछलियों को बीमारियों से बचाएगा और हेल्दी भी बनाएगा AI का इस्तेमाल

Fisheries Tips: मछलियों को बीमारियों से बचाएगा और हेल्दी भी बनाएगा AI का इस्तेमाल

फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार ताजा मछली न सिर्फ बाजार बल्कि घरों तक पहुंच रही है. टैक्नोलॉजी की मदद से ही मछली के बीज दो किलो वजन तक की मछली के रूप में तैयार हो रहे हैं. साथ ही एआई के चलते ही बीमार मछलियों के बाजार तक आने का खतरा भी कम हो गया है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 11, 2026,
  • Updated Aug 11, 2026, 11:53 AM IST

बाजार में मछली के दाम उसकी ताजगी और वजन से तय होते हैं. अगर मछली ताजी है तो ग्राहक 10-20 रुपये किलो तक ज्यादा देने को तैयार रहता है. लेकिन तालाब से बाजार तक मछली को ताजा रखना कोई आसान काम नहीं है. वहीं मछलियों का वजन बढ़ाना भी आज के वक्त में बड़ा मुश्किल होता है. लेकिन फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो ये इतना मुश्किल भी नहीं है. बस जरूरत इस बात की है कि बाजार में जो टैक्नोलॉजी मौजूद है उसका मछली पालन में इस्तेमाल किया जाए. 

जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर आप मछली पालन से जुड़ी बहुत सारी परेशानियों को दूर कर सकते हैं. जैसे तालाब में पल रहीं मछलियों की सेहत जांचने के लिए अब जाल से पकड़कर उन्हें बाहर निकालने की जरूरत नहीं पड़ती है. एआई की मदद से ड्रोन, रडार, कैमरा और सेंसर का इस्तेमाल कर मछलियों और उनके तालाब के पानी की जांच आराम से कर ली जाती है.  

AI से होती है तापमान-प्रदूषण की जांच 

मछलियां 24 घंटे पानी में रहती हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि ठंडा-गरम हर तरह का पानी उनके लिए चल जाएगा. मछलियों को भी एक तय तापमान वाला पानी तालाब में चाहिए होता है. मतलब ठंड में न तो बहुत ज्यादा ठंडा और गर्मियों में न ज्यादा गरम. अभी पानी की जांच मछली पालक तालाब के पानी में थर्मामीटर लगाकर करते हैं. लेकिन एआई की मदद से ड्रोन में लगा सेंसर पानी के तापमान की रिपोर्ट मोबाइल और लैपटॉप पर भेज देता है. तालाब का पानी प्रदूषित हो गया है और कैसे हुआ है इसकी रिपोर्ट भी ड्रोन में लगे सेंसर बता देते हैं. 

फोटो बताता है मछलियों की बीमारी

ड्रोन में लगे कैमरे लगातार तालाब की तस्वीर भेजते रहते हैं. तालाब पर बहुत नीचे ड्रोन उड़ाने से उसमे मौजूद मछलियां भी साफ-साफ दिखाई देने लगती हैं. इससे मछलियों की प्रमुख बीमारी लाल धब्बा भी दिखाई दे जाती है. या फिर मछलियां तालाब में कैसा व्यवहार कर रही हैं ये भी पता चल जाता है. फिशरीज एक्सपर्ट बताते हैं कि तालाब में दवाई का छिड़काव भी ड्रोन से किया जा रहा है. तालाब में दवाई का छिड़काव करते वक्त यह ख्याल रखना पड़ता है कि सभी मछलियां दवाई के प्रभाव में आ जाएं.

लेकिन हाथ से दवाई का छिड़काव कैसे भी कर लो तालाब में कुछ न कुछ मछलियां छूट ही जाती हैं. कुछ बीमारी ऐसी होती हैं कि अगर सभी मछली ठीक हो जाएं और एक भी बीमार रह गई तो वो फिर से पूरे तालाब की मछलियों को बीमार कर देगी. जबकि ड्रोन से खेत की तरह दवाई पूरे हिस्से में छिड़क दी जाती है और तालाब की हर एक मछली उसके प्रभाव में आ जाती है. मछली तालाब के बीच में है. आपको किनारे से दिखाई नहीं दे रही है तो ऐसे में ड्रोन उसे आपके मोबाइल और लैपटॉप पर दिखा देता है.

ड्रोन से हर मछली को मिलता है फीड

हम कभी तालाब के एक कोने पर तो कभी दूसरे और तीसरे कोने पर जाकर मछलियों को हाथ से दाना खिलाते हैं. कोशिश यही होती है कि सभी मछलियों को बराबर दाना मिल जाए. ऐसा ना हो कि कोई मछली मोटी ताजी हो जाए तो कोई कमजोर रह जाए. ऐसा इसलिए करना होता है कि तालाब की जो ताकतवर मछली हैं वो दाना खाने के लिए एकदम आगे यानि तालाब के किनारे पर आ जाती हैं, जबकि कमजोर मछली पीछे रह जाती है. 

उसे भरपेट दाना नहीं मिल पाता है. जिसके चलते दूसरी मछलियों के मुकाबले वो कम वजन की रह जाती हैं. इससे मछली पालक को भी बड़ा नुकसान होता है. लेकिन ड्रोन से जब दाना तालाब में डाला जाता है तो वो बराबर रूप से पूरे तालाब में दाना डालता है. जिसके चलते तालाब के सभी हिस्से में मौजूद मछलियों को दाना खाने का मौका मिल जाता है.

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