
पशुओं की बहुत सारी ऐसी बीमारियां हैं जो मौसम के हिसाब से होती हैं. अप्रैल से ही ही गर्मी का एहसास शुरू हो जाता है. अब तो मई को भी 6 दिन बीत चुके हैं. हाल ही में तापमान 40 और 42 डिग्री को भी पार कर गया था. लेकिन बीच-बीच में हुइ्र हल्की बारिश ने मौसम को बदल दिया. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो यही वो वक्त होता है जब मौसम के हिसाब से बीमारियां पशुओं के बाड़े में दस्तक देती हैं. ये बीमारियां पशुओं को परेशान तो करती ही हैं, साथ में उत्पादन पर भी असर डालती हैं. इलाज पर होने वाले खर्च से लागत बढ़ जाती है.
इसलिए जरूरी है कि बदलते मौसम के चलते पशुओं के बाड़े में बदलाव किए जाएं. हालांकि इसे देखते हुए पशुओं को जूनोसिस या जूनोटिक बीमारियों से बचाने के लिए नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) चलाया जा रहा है. मिशन के तहत जहां बायो सिक्योरिटी का इस्तेमाल करने से जुड़े टिप्स पशुपालकों को दिए जाते हैं. साथ ही ये सलाह दी जाती है कि पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए साइंटीफिक तरीके से पशु पालन किया जाए.
पशुपालन मंत्रालय से जुड़े जानकारों की मानें तो वन हैल्थ मिशन के तहत एनीमल फार्म पर बॉयो सिक्योरिटी बहुत जरूरी है. कोरोना जैसी बीमारी फैलने के बाद से तो इसकी जरूरत और ज्यादा महसूस की जाने लगी है.
एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो साइंटीफिक तरीके से किया गया पशुपालन पशुओं के साथ-साथ इंसानों को भी पशुओं की बीमारी से सुरक्षित रखता है. क्योंकि इंसानों में होने वाली करीब 70 फीसद बीमारियां पशुओं से होती हैं. इन्हें जूनोसिस या जूनोटिक भी कहा जाता है.
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