Calf Care in Winter: सर्दियों में कैसी होनी चाहिए बछ़ड़े की खुराक, जन्म के साथ कैसे करें शुरुआत 

Calf Care in Winter: सर्दियों में कैसी होनी चाहिए बछ़ड़े की खुराक, जन्म के साथ कैसे करें शुरुआत 

Calf Care in Winter तय किए गए वक्त के मुताबिक अक्टूबर से लेकर दिसम्बर का महीना गाय-भैंस के प्रजनन का होता है. नवजात बछड़े मौसम की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. कई बार बीमारियों के चलते बछड़ों की मौत तक हो जाती है. बछड़ों की बात करें तो जन्म से तीन महीने की उम्र के बीच करीब 32 से 35 फीसद मौतें होती हैं. एनिमल एक्सपर्ट इसी को देखते हुए ठंड के मौसम से बछड़ों को बचाने के टिप्स देते हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 31, 2026,
  • Updated Aug 31, 2026, 12:31 PM IST

बड़े पशु गाय-भैंस के लिए तो हर मौसम में खुराक का मैनेजमेंट हो जाता है. लेकिन इस दौरान सबसे ज्यादा पौष्टियक खुराक की जरूरत बछड़ों को होती है. जन्म के साथ ही बछड़ों को खास खुराक चाहिए होती है. क्योंकि आने वाले तीन महीने उनकी तेजी से बढ़वार होती है. वहीं दूसरी ओर मौसम के हिसाब से उन्हें खुराक देना भी जरूरी हो जाता है. जैसे सर्दियों में पैदा होने वाले बछड़ों को कैसी खुराक दी जाए. खुराक में कब और कितना दिया जाना चाहिए. मौसम के साथ ही उम्र के हिसाब से खुराक कैसी होनी चाहिए. 

ये सब वो बातें हैं जो बछड़ों की ग्रोथ में भी मदद करती हैं और उन्हें बीमारियों से भी बचाती हैं. सर्दियों का मौसम इंसानों संग जानवरों के लिए भी परेशानी लेकर आता है. कड़ाके की ठंड दिसम्बर और जनवरी के दो महीने ज्यादा रहती है. इस मौसम में बछड़ों की देखभाल के साथ ही बड़े पशुओं को भी ठंड से बचाने वाली खुराक का इंतजाम करना ज्यादा टेढ़ा काम होता है. क्योंकि यह ये मौसम पशुओं की ब्रीडिंग का भी होता है.

ठंड में ऐसी हो बछड़ों की खुराक 

  • जन्म के साथ ही बछड़े का रूमेन (पेट) विकसित होना शुरू हो जाता है. 
  • पेट के हिसाब से बछड़ा ज्यादातर रेशेदार चीजें खाना शुरू कर देता है.  
  • तीन महीने की उम्र में जानवर हरा रेशेदार चारा खाने लगता है. 
  • रेशेदार चारे से बछड़े के रखरखाव और ग्रोथ में मदद मिलती है. 
  • रेशेदार चारे से ठंड का तनाव देर करने के लिए एनर्जी मिलती है.
  • बछड़े का पेट छह महीने की उम्र तक पूरी तरह से विकसित हो जाता है. 
  • पशु आमतौर पर अपने शरीर के वजन का करीब 2.5 फीसद ही खाते हैं.
  • पुआल, उपलब्ध हरी घास के साथ कंसंट्रेट और क्वालिटी का चारा खि‍लाएं. 
  • सर्दियों में चारे की रेगुलर सप्लाई देनी चाहिए. 
  • ज़्यादातर पशु खुराक में मोटे चारे को पसंद करते हैं.  
  • मोटा चारा पाचन प्रक्रिया के दौरान ज़्यादा गर्मी पैदा करता है. 
  • अगर चारे की सप्लाई सीमित है, तो कंसंट्रेट की क्वालिटी और मात्रा में बदलाव करें. 
  • अनाज एक बार में खिलाने के बजाय थोड़ी मात्रा में बार-बार दें. 
  • दिए जाने वाले कंसंट्रेट की मात्रा हर हफ़्ते 50-100 ग्राम बढ़ाई जा सकती है. 
  • बछड़े में एक्स्ट्रा थन हैं, तो उसे शुरुआत में ही निकलवा दें. 

एक साथ ज़्यादा खिलाने से एसिडोसिस हो सकता है दूध देने वाली गाय के दूध में फैट की मात्रा में कमी आना, डाइट में फाइबर की मात्रा में कमी का साफ संकेत है कमज़ोर और अच्छी/खराब हालत वाले जानवर ठंड बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं

ये भी पढ़ें-

Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात 

Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम

MORE NEWS

Read more!