Calf Diet-Care: जन्म लेने के बाद ऐसी होनी चाहिए गाय-भैंस के बच्चे की खुराक और देखभाल

Calf Diet-Care: जन्म लेने के बाद ऐसी होनी चाहिए गाय-भैंस के बच्चे की खुराक और देखभाल

Calf Diet-Care बछिया है तो बड़े होकर दूध देगी और अगर मेल है तो एक साल का होने पर कभी भी बेचकर नकद कमाई की जा सकती है. खूब अच्छा खि‍ला-पिलाकर ब्रीडिंग बुल भी बनाया जा सकता है. इसी सब के चलते ही बछड़ों की खास तरह से देखभाल बहुत जरूरी हो जाती है.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 28, 2026,
  • Updated Aug 28, 2026, 9:00 AM IST

जब गाय-भैंस पालन की बात होती है तो माना जाता है कि ये सिर्फ दूध के लिए ही किया जाता है. दूध बेचकर ही मुनाफा कमाया जा सकता है. हालांकि ऐसा नहीं है, अगर आप साइंटीफिक तरीके से पालन कर रहे हैं तो गाय-भैंस का गोबर भी बिकेगा और होने वाला बच्चा भी मोटा मुनाफा कराएगा. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि जन्म के बाद होने वाले बच्चे की इस तरह से देखभाल की जाए कि वो हैल्दी बने. वैसे तो जन्म के फौरन बाद ही कुछ दिन तक बछड़े को खीस (कोलोस्ट्रम) पिलाने की सलाह दी जाती है. 

जन्म के तीन-चार दिन तक तो सब कुछ ठीक चलता है. लेकिन जन्म के एक हफ्ते बाद पशुपालक की सबसे बड़ी परेशानी ये होती है कि वो नवजात बछड़े को खाने में क्या दें. मौसम अगर सर्दी का है तो पानी कैसे पिलाएं. इतना ही नहीं जन्म के बाद बछड़े की देखभाल कैसे की जाए. बछड़े को लेकर पशुपालक इसलिए भी परेशान रहते हैं कि ये पशुपालन में बड़े मुनाफे के तौर पर देखा जाता है.

ऐसी होनी चाहिए बछड़े की खुराक

  • सुबह-शाम 1.5-1.5 किलोग्राम कोलोस्ट्रम (खीस) पिलाना चाहिए. 
  • बच्चे को वक्त से पिलाया गया खीस बीमारियों से लड़ने में मदद करता है.
  • बच्चे को उसके वजन का 10 फीसद दूध पिलाना चाहिए. 
  • बच्चे को सुबह-शाम दो बार में दूध पिलाना चाहिए. 
  • 15 दिनों के बाद बछड़े को सूखा चारा और मिश्रण खाने को दें. 
  • हर सात दिन बाद मिश्रण को 50-100 ग्राम तक बढ़ाया जा सकता है.
  • तीन महीने की उम्र में बछड़े को हरा रेशेदार चारा खाने में दें. 
  •  अगर बछड़े में अतिरिक्त थन है तो उसे बचपन में ही काट दें. 
  • दस्त से पीड़ित बछड़ों को दूध पिलाने के 2 घंटे बाद इलेक्ट्रोलाइट्स खाने में दें. 
  • इलेक्ट्रोलाइट्स में खनिज, ऊर्जा और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते हैं.

जन्म के साथ ही ऐसे करें देखभाल 

  • भैंस बच्चे को नहीं चाटती है तो उसे साफ तौलिए से रगड़ दें.
  • जन्म लेते ही बच्चे के ऊपर से जेर-झिल्ली हटा दें. 
  • बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो तो उसकी छाती की मालिश कर दें. 
  • ठीक से सांस ना आने पर बच्चे की पिछली टांगें पकड़ कर उल्टा लटकाएं.
  • नये ब्लेड या गर्म पानी में साफ की गई कैंची से बच्चे की नाल काट दें. 
  • जिस जगह से नाल काटी गई है वहां टिंचर आयोडीन लगा दें.
  • पहला दूध पीने के बाद बच्चे का दो घंटे के अंदर गोबर करना जरूरी है. 
  • बच्चे को सर्दी से बचाने के संसाधनों का इंतजाम करें. 
  • 10 दिन की उम्र पर बच्चे को पेट के कीड़ों की दवा जरूर पिला दें. 
  • पेट के कीड़ों की दूसरी खुराक बच्चे को 21 दिन की उम्र पर पिलाएं.   

ये भी पढ़ें-

Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात 

Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम

MORE NEWS

Read more!