तीन दिन बाद सितम्बर का महीना शुरू हो जाएगा. सितम्बर से ही मौसम में बदलाव दिखना शुरू हो जाता है. गर्मी पीछे छूटने लगती है और सर्दियों की दस्तक शुरू हो जाती है. लेकिन इस सब के बीच बारिश भी अपना एहसास कराती रहती है. बारिश की वजह से ही ठंड बढ़ने लगती है. एक्सपर्ट की मानें तो 20 सितम्बर के बाद से सुबह और शाम की सर्दी का एहसास होने लगता है. इस तरह का मौसम सिर्फ इंसान ही नहीं पशुओं को भी परेशान करता है. मौसम में होने वाले बदलाव के चलते ही पशु तनाव में आ जाता है. जिसके चलते सबसे उसका उत्पादन घटने लगता है.
और अगर इसी दौरान पशु बीमार हो गया तो फिर पशुपालकों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है. क्योंकि उत्पादन घटा तो वो नुकसान हुआ, और दूसरी ओर पशु के बीमार पड़ने पर उसका इलाज कराया तो वो खर्च अलग से. इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट ये सलाह देते हैं कि जैसे ही मौसम बदलने लगे तो फौरन ही पशुओं की खुराक और उनके शेड का मैनेजमेंट बदल देना चाहिए.
बदलते मौसम में पशुओं की खुराक
- पशुओं को दी जाने वाली खुराक में सरसों का तेल शामिल कर लें.
- सरसों का तेल पशु को दी जानी वाली खुराक का दो फीसद देना चाहिए.
- पशु को हरा चारा और भरपूर मात्रा में सूखा चारा देना चाहिए.
- पशु के वजन के हिसाब से उसकी खुराक में दाने का वजन बढ़ा देना चाहिए.
- पशुओं को गुड़ का शीरा पांच से 10 फीसद तक दिया जा सकता है.
- शाम को दूध दुहाने के वक्त भी पशुओं को हरा चारा खाने में देना चाहिए.
- पशुओं के पीने का पानी गुनगुना या बोरवेल का ताजा होना चाहिए.
- पशुओं को ठंड के तनाव से बचाने के लिए 10 फीसद एडिशनल सप्लीमेंट दे सकते हैं.
- पशुओं को दिन में तीन से चार बार खुराक देनी चाहिए.
सर्दियों के लिए ऐसा हो एनिमल शेड
- पशु के शेड को मोटे पर्दे से कवर करना चाहिए.
- शेड में गर्म हवा के लिए ब्लोअर और रेडिएटर का इस्तेमाल किया जा सकता है.
- पशुओं की पीठ को खाली बोरी या कंबल से ढक देना चाहिए.
- पशु का बिस्तर रबर शीट का और सूखा होना चाहिए.
- पशु का बिस्तर मिट्टी या लकड़ी के बुरादे का भी है तो सूखा हो.
- पूरा शेड तीन तरफ से 5 फीट ऊंची दीवार से घिरा होना चाहिए.
- पशु शेड का निर्माण इलाके की जलवायु के हिसाब से कराया जाना चाहिए.
- पशुओं का शेड कम से कम स्वच्छ, सुविधाजनक, आरामदायक होना चाहिए.
- पशुओं को ज्यादा से ज्यादा खुली जगह में रखा जाए.
- खुली जगह होने से जब मन चाहे तब पशु आराम से घूम-फिर लेते हैं.
- खुली जगह में घूमने-फिरने से पशु के उत्पादन पर अच्छा असर पड़ता है.
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