
उत्पादन बनाए रखने और मौसम से पशुओं को बचाने के लिए तैयारी करना बहुत जरूरी है. मौसम के विपरीत असर से बचने की जरूरत सिर्फ इंसान ही नहीं पशुओं को भी होती है. क्योंकि मौसम में होने वाले बदलाव के चलते पशु बीमार पड़े तो फिर इसका सबसे पहला असर उत्पादन पर ही देखने को मिलेगा. इसलिए जरूरी है कि आने वाले नए मौसम सर्दियों की तैयारी अभी से कर ली जाए. यही वजह है कि एनिमल एक्सपर्ट सितम्बर से ही तैयारियों की सलाह देते हैं. वर्ना तो जरा सी लापरवाही होते ही पशुपालन की लागत बढ़ जाती है.
उत्पादन घटने के साथ-साथ बीमारियों के इलाज का खर्चा बढ़ जाता है. इसलिए मौसम बरसात का हो या गर्मी-सर्दी का, हर एक मौसम पशुओं के लिए बीमारी भी लाता है. पशुओं के खानपान, रखरखाव और टीकाकरण में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. केन्द्र और राज्य सरकार भी किसानों को इस तरह के नुकसान से बचाने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ लोग पशुओं का बीमा कराना और उनकी टैगिंग (रजिस्ट्रेशन) कराना पशुपालकों को बेकार, बेवजह का काम लगता है. लेकिन किसी भी मौसमी बीमारी के चलते पशु मरते हैं तो बीमा की रकम ही पशुपालक को राहत देती है. और बिना टैगिंग कराए बीमा की रकम मिलती नहीं है. अगर ऐसी ही कुछ योजनाओं का फायदा किसान भाई-बहिन उठा लें तो पशुपालन में आने वाले जोखिम को कम किया जा सकता है. गांव और कस्बों के पशु अस्पताल में भी ये सभी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं.
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