Animal Care: सितंबर-अक्टूबर के लिए अभी से कर लें तैयारी, गाय-भैंस, भेड़-बकरियों को नहीं होगी परेशानी 

Animal Care: सितंबर-अक्टूबर के लिए अभी से कर लें तैयारी, गाय-भैंस, भेड़-बकरियों को नहीं होगी परेशानी 

Animal Care सितंबर के आखि‍र तक या फिर अक्टूबर तक शेड को भी सर्दियों के हिसाब से तैयार कर लेना चाहिए. इसी तरह से और भी छोटे-बड़े कुछ ऐसे काम होते हैं जो सर्दियों से पहले पूरा कर लेना चाहिए. ऐसा करने से ना तो पशु बीमार पड़ेगा और ना ही उत्पादन घटेगा. साथ ही सर्दियों के दौरान हरे चारे की कमी ना हो इसके लिए सितंबर में ही चारे की बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए.

Cow Urine Dairy Pilot ProjectCow Urine Dairy Pilot Project
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 31, 2026,
  • Updated Aug 31, 2026, 11:50 AM IST

उत्पादन बनाए रखने और मौसम से पशुओं को बचाने के लिए तैयारी करना बहुत जरूरी है. मौसम के विपरीत असर से बचने की जरूरत सिर्फ इंसान ही नहीं पशुओं को भी होती है. क्योंकि मौसम में होने वाले बदलाव के चलते पशु बीमार पड़े तो फिर इसका सबसे पहला असर उत्पादन पर ही देखने को मिलेगा. इसलिए जरूरी है कि आने वाले नए मौसम सर्दियों की तैयारी अभी से कर ली जाए. यही वजह है कि एनिमल एक्सपर्ट सितम्बर से ही तैयारियों की सलाह देते हैं. वर्ना तो जरा सी लापरवाही होते ही पशुपालन की लागत बढ़ जाती है. 

उत्पादन घटने के साथ-साथ बीमारियों के इलाज का खर्चा बढ़ जाता है. इसलिए मौसम बरसात का हो या गर्मी-सर्दी का, हर एक मौसम पशुओं के लिए बीमारी भी लाता है. पशुओं के खानपान, रखरखाव और टीकाकरण में जरा भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. केन्द्र और राज्य सरकार भी किसानों को इस तरह के नुकसान से बचाने के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती हैं.  

सरकारी योजनाओं का ऐसे उठाएं फायदा 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ लोग पशुओं का बीमा कराना और उनकी टैगिंग (रजिस्ट्रेशन) कराना पशुपालकों को बेकार, बेवजह का काम लगता है. लेकिन किसी भी मौसमी बीमारी के चलते पशु मरते हैं तो बीमा की रकम ही पशुपालक को राहत देती है. और बिना टैगिंग कराए बीमा की रकम मिलती नहीं है. अगर ऐसी ही कुछ योजनाओं का फायदा किसान भाई-बहिन उठा लें तो पशुपालन में आने वाले जोखिम को कम किया जा सकता है. गांव और कस्बों के पशु अस्पताल में भी ये सभी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं. 

पशुपालकों के लिए जरूरी काम  

  • अक्टूबर से सर्दी शुरू हो जाती है. इसलिए पशुओं को सर्दी से बचाने का इंतजाम कर लें. 
  • सर्दी के मौसम में ज्यादातर भैंस हीट में आती हैं. ऐसा होते ही पशु को गाभिन कराएं. 
  • भैंस को मुर्राह नस्ल के नर से या नजदीकी केन्द्र पर कृत्रिम गर्भाधान कराएं. 
  • भैंस बच्चा देने के 60-70 दिन बाद दोबारा हीट में ना आए तो फौरन ही जांच कराएं. 
  • गाय-भैंस को जल्दी हीट में लाने के लिए मिनरल मिक्च्र जरूर खिलाएं. 
  • पशुओं को बाहरी कीड़ों से बचाने के लिए समय-समय पर दवाई का छिड़काव कराएं. 
  • दुधारू पशुओं को थैनेला रोग से बचाने के लिए डाक्टर की सलाह लें. 
  • पशुओं को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवाई दें.
  • ज्यादा हरा चारा लेने के लिए बरसीम की बीएल 10, बीएल 22 और बीएल 42 की बिजाई अक्टू‍बर में कर दें. 
  • बरसीम का ज्यादा चारा लेने के लिए सरसों की चाइनीज कैबिज या जई मिलाकर बिजाई करें.
  • बरसीम के साथ राई मिलाकर बिजाई करने से चारे की पौष्टिकता और उपज दोनों ही बढ़ती हैं.
  • बरसीम की बिजाई नए खेत में कर रहे हैं तो पहले राइजोबियम कल्चर उपचारित जरूर कर लें.
  • जई का ज्यादा चारा लेने के लिए ओएस 6, ओएल 9 और कैन्ट की बिजाई अक्टूबर बीच में कर दें. 
  • बछड़े को बैल बनाने के लिए छह महीने की उम्र पर उसे बधिया करा दें. 

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