पशुओं की छोटी-छोटी बीमारियों में भी कई बार ऐसे मौके आ जाते हैं कि उन्हें इलाज के लिए एंटी बायोटिक्स दवाईयां खिलानी पड़ती हैं. और थोड़ी-थोड़ी करके ये इतनी ज्यादा हो जाती है कि इसके चलते पशुओं का प्रोडक्ट दूषित होने लगते हैं. यहां तक की दूध और अंडे में पहले-दूसरे स्थान पर होने के बाद भी हम उस तरह से एक्सपोर्ट नहीं कर पाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह एंटी बायोटिक्स दवाई हैं. क्योंकि एक्सपोर्ट के दौरान जब प्रोडक्ट की जांच होती है तो उसमे एंटी बायोटिक्स के कण पाए जाते हैं. और प्रोडक्ट जांच में फेल हो जाता है.
जबकि आज ज्यादातर देश एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) फ्री एनिमल प्रोडक्ट की डिमांड करते हैं. जबकि एएमआर डेयरी, पोल्ट्री और फिशरीज में एक बड़ी परेशानी बन चुकी है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि इसका एक मात्र इलाज ये है कि पशुओं को एंटी बायोटिक्स दवाई न खिलाकर पशुओं के वैक्सीनेशन पर ज्यादा जोर दिया जाए. एक्सपर्ट भी वैक्सीनेशन के लिए ही प्रोत्साहित करते हैं. सुविधा के लिए एक्सपर्ट ने वैक्सीनेशन का एक चॉर्ट भी बनाया है.
वैक्सीनेशन कराया तो होंगे ये फायदे
- वैक्सीनेशन होने के बाद पशु बीमारियों के अटैक से बचे रहते हैं.
- वैक्सीनेशन होने के बाद महामारियों का जल्द असर नहीं होता है.
- पशुओं से मनुष्यों में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है.
- बीमारियो के इलाज से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव होता है.
- एनिमल प्रोडक्ट से इंसानों में होने वाली बीमारी से बचाव होता है.
- किसानों की पशुपालन में कम लागत से मुनाफा बढ़ जाता है.
वैक्सीनेशन से पहले बरतें ये सावधानी
- प्रथम टीकाकरण केवल स्वस्थ पशुओं में ही करना चाहिए.
- टीकाकरण से कम से कम दो सप्ताह पहले कृमिनाशक दवाई देनी चाहिये.
- टीकाकरण के समय पशुओं का हेल्दी होना जरूरी है.
- बीमार और कमजोर पशुओं का टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
- बीमारी फैलने से करीब 20-30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना चाहिए.
- रोग फैलने के संभावित समय से करीब 20-30 दिन पहले करना चाहिए.
- मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में रखे टीके ही पशुओं को लगाने चाहिए.
- जहां पशु ज्यादा हों वहां झुण्ड में पशुओं का टीकाकरण करना जरूरी होता है.
- गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
- टीकाकरण का रिकार्ड रखने के लिये हमेशा पशु स्वास्थ्य कार्ड बनाएं.
- टीकाकरण के दौरान हर पशु के लिये अलग-अलग सूईयों का इस्तेमाल करें.
- टीके में इस्तेमाल की गई सूई और सिरिज को नियमानुसार डिस्पोज करें.
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