Goat Meat: बकरों का बाजार बड़ा करने में मददगार बनेंगे स्लॉटरिंग के ये दो नए मॉडल

Goat Meat: बकरों का बाजार बड़ा करने में मददगार बनेंगे स्लॉटरिंग के ये दो नए मॉडल

Goat Meat भारत में 15 करोड़ से ज्यादा बकरे-बकरियां हैं. करीब 3.5 करोड़ ग्रामीण परिवार बकरी पालन जुड़े हैं या उस पर निर्भर हैं. आज भी बकरी पालन दूध से ज्यादा मीट के लिए हो रहा है, लेकिन इस सब के बावजूद बकरी पालक ठीक-ठाक मुनाफे से बहुत दूर हैं. उनके पास एक अच्छे बाजार की कमी लगातार बनी हुई है. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 02, 2026,
  • Updated Apr 02, 2026, 2:26 PM IST

केन्द्र ही नहीं राज्य सरकारें भी बकरी पालन को बढ़ावा दे रही हैं. किसानों की इनकम बढ़ाने में बकरी पालन को एक बड़े स्त्रोत के रूप में देखा जा रहा है. खासतौर पर बकरी पालन के लिए महिलाओं को आगे लाने की कोशि‍श चल रही है. नेशनल लाइव स्टॉक मिशन समेत कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं. सभी तरह से कोशि‍श बस यही है कि बकरा बाजार बड़ा हो जाए. लेकिन गोट एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ बकरी पालन को बढ़ावा देने से ही बकरा बाजार बड़ा नहीं होगा. इसके लिए ये भी जरूरी है कि बकरे का मीट खाने वालों की संख्या बढ़े. लेकिन ये तभी मुमकिन होगा जब मीट खाने वालों को एक साफ-सुथरा बाजार मिलेगा. 

इसके लिए बकरों की स्लॉटरिंग के पुराने तरीकों को बदलना होगा. मीट बेचने के लिए नए मॉडल अपनाने होंगे. और ये सिर्फ सरकार के भरोसे ही मुमकिन नहीं होगा, इसके लिए मीट कारोबार से जुड़े लोगों को भी सामने आना होगा. स्लॉटरिंग और मीट बेचने के नए मॉडल तैयार हो चुके हैं, लेकिन अफसोस की अभी इक्का-दुक्का लोगों ने ही इसके मुताबिक काम करना शुरू किया है.  

छोटे स्लॉटर हाउस से बड़ा होगा बकरा बाजार 

गोट एक्सपर्ट का कहना है कि मोहल्ले के बाजारों में बकरों की स्लॉटरिंग में साफ-सफाई के मानकों को पूरा नहीं किया जाता है. मीट बेचने के दौरान भी सफाई का कोई खास ध्यान नहीं रखा जाता है. यही वजह है कि आज भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो मीट खाना चाहते हैं कि दुकान और स्लॉटरिंग के तरीकों को देखकर दूरी बना लेते हैं. हालांकि इस परेशानी को दूर करने के लिए दो मॉडल तैयार किए गए हैं.

जैसे बकरा मीट के लिए किसी बड़े स्लॉटर हाउस की जरूरत नहीं है. तमिलनाडू में सरकार और एफपीओ की मदद से मीट बेचने वाली 10 से 15 दुकानों के बीच एक छोटा स्लॉटर हाउस बनाकर दिया जा रहा है. ये 20 से 25 लाख रुपये की लागत से तैयार हो जाता है.

अगर इसी तरह के पैटर्न पर काम किया जाए तो बकरी पालकों के लिए ये एक बड़ी मदद होगी. अगर डिमांड की बात करें तो घरेलू बाजार में ही बकरे के मीट की इतनी है कि अभी जितनी प्रोसेसिंग यूनिट काम कर रही हैं, अगर उतनी ही और आ जाएं तो डिमांड पूरी नहीं हो पाएगी.

दो दुकान हैं तो बस में होगी स्लॉटरिंग

नेशनल मीट रिसर्च सेंटर, हैदराबाद ने स्लॉटरिंग के लिए एक मोबाइल वैन तैयार की है. ये एक बस जैसी होती है. इसके अंदर स्लॉटरिंग से जुड़े उपकरण होते हैं. ये उन एरिया में अच्छी साबित होगी जहां मीट की दो-तीन दुकान हैं. ऐसी जगह पर सुबह वैन पहुंच जाती है. बकरों की स्लॉटरिंग करके दुकानदारों को दे देती है. स्लॉटरिंग का एक रेट तय है और उसी के हिसाब से फीस ली जाती है. इसी तरह से ये वैन घूमती रहती है. 

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