Zoonotic Disease: गर्मियों में पशुओं को बीमारियों से बचाएगा NOHM, 12 टिप्स का करना होगा पालन 

Zoonotic Disease: गर्मियों में पशुओं को बीमारियों से बचाएगा NOHM, 12 टिप्स का करना होगा पालन 

Zoonotic Disease एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो साइंटीफिक तरीके से किया गया पशुपालन पशुओं के साथ-साथ इंसानों को भी पशुओं की बीमारी से सुरक्षित रखता है. क्योंकि इंसानों में होने वाली करीब 70 फीसद बीमारियां पशुओं से होती हैं. इन्हें जूनोसिस या जूनोटिक डिजीज भी कहा जाता है.

यूपी की गौशालाओं में लगेंगे सीसीटीवी. (Photo: Representational)यूपी की गौशालाओं में लगेंगे सीसीटीवी. (Photo: Representational)
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 01, 2026,
  • Updated Apr 01, 2026, 9:41 AM IST

जूनोटिक डिजीज के खि‍लाफ के देश में नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) चलाया जा रहा है. अंतराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद से पशुपालन मंत्रालय इसका संचालन कर रहा है. इसका एक बड़ा फायदा ये है कि ये पशुओं से इंसानों में होने वाली बीमारियों को फैलने से रोकता है. इस तरह की बीमारियां किसी भी मौसम में हो सकती हैं. खासतौर पर गर्मियों के दौरान ऐसी बीमारियां बहुत पनपती हैं. पशुओं और इंसानों को जूनोसिस या जूनोटिक बीमारियों से बचाने के लिए मिशन के तहत जहां बायो सिक्योरिटी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है, वहीं पशुओं को बीमारी से बचाने को साइंटीफिक तरीके से पशु पालन करने की हिदायत दी जाती है. 

मंत्रालय की ओर से समय-समय पर आम जनता और पशुपालकों से अपील की जाती रहती है. दोनों ही लोगों के लिए कुछ जरूरी टिप्स भी जारी किए जाते हैं. इसका सीधा मकसद पशु और इंसानों दोनों को ही हर छोटी-बड़ी बीमारी से बचाना है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि जूनोटिक डिजीज से इंसान और पशु दोनों ही प्रभावित होते हैं.  

पशुपालकों के लिए हैं ये टिप्स  

पशुपालन मंत्रालय से जुड़े जानकारों की मानें तो वन हैल्थ मिशन के तहत एनीमल फार्म पर बॉयो सिक्योरिटी बहुत जरूरी है. कोरोना जैसी बीमारी फैलने के बाद से तो इसकी जरूरत और ज्यादा महसूस की जाने लगी है.  

  • सबसे पहले अपने एनीमल फार्म की बाड़बंदी कराएं. 
  • बाड़बंदी होने से सड़क पर घूमने वाला जानवर फार्म में नहीं घुसेगा. 
  • फार्म के अंदर और बाहर दवा का छिड़काव कराएं. 
  • हैंड सेनेटाइज में काम आने वाली दवा फार्म पर रखें.
  • फार्म में बाहर से आने वाले व्यक्ति के जूते बाहर ही उतरवाएं.
  • जूते फार्म के बाहर उतरवा नहीं सकते तो उन्हें सेनेटाइज करें. 
  • आने वाले के हाथ और कपड़ों को भी सेनेटाइज करवाएं. 
  • पीपीई किट पहनाकर ही फार्म के अंदर ले जाएं. 
  • फार्म पर नए आने वाले पशु को कम से कम 15 दिन अलग रखें. 
  • छोटे बच्चे, बीमार, गर्भवती, हेल्दी और दूध देने वाले पशुओं को अलग रखें. 
  • बदलते मौसम के हिसाब से बाड़े में पशुओं का रखरखाव रखें. 
  • बरसात के मौसम में पशुओं को खासतौर पर मच्छर-मक्खियों के प्रकोप से बचाएं.

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