FMD Disease: गाय-भैंस को नहीं होगी जानलेवा खुरपका-मुंहपका बीमारी, करने होंगे ये काम  

FMD Disease: गाय-भैंस को नहीं होगी जानलेवा खुरपका-मुंहपका बीमारी, करने होंगे ये काम  

FMD Disease एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गाय-भैंस और भेड़-बकरी की खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी मीट, डेयरी प्रोडक्ट‍ और मिल्क एक्सपोर्ट की बड़ी रुकावट है. जब तक भारत को एफएमडी फ्री जोन का सर्टिफिकेट नहीं मिलता तो तीनों चीजों का एक्सपोर्ट भी नहीं बढ़ेगा. इसके लिए वैक्सीनेशन ड्राइव चलाने के साथ ही और भी कोशि‍शें की जा रही हैं. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 01, 2026,
  • Updated Apr 01, 2026, 2:29 PM IST

खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोशि‍शें चल रही हैं. पशुओं को इस बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीनेशन अभि‍यान चलाया जा रहा है. डिजीज फ्री कंटेंटमेंट जोन बनाने की भी तैयारी चल रही है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इस बीमारी का असर सिर्फ पशुओं पर ही नहीं होता है, बल्कि पीडि़त पशु के प्रोडक्ट इस्तेमाल करने वाले इंसान भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. खास बात ये है कि इस बीमारी से कोई एक-दो देश नहीं पूरा ही विश्व परेशान है. डेयरी प्रोडक्ट और मीट एक्सपोर्ट पर भी इसका बड़ा असर पड़ रहा है. 

आम पशुपालक भी इस बीमारी के चलते खासे परेशान हैं. क्योंकि बीमारी की चपेट में आते ही पशु का दूध उत्पादन घट जाता है. पशुओं की ग्रोथ रुक जाती है. बांझपन की बीमारी आ जाती है. बैलों में काम करने की क्षमता कम हो जाती है. कई बार तो वक्त से उपाय नहीं अपनाने के चलते पशु की मौत तक हो जाती है.

ये हैं एफएमडी के लक्षण 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि एफएमडी पीड़ित किसी भी पशु जैसे गाय-भैंस, भेड़-बकरी और सूअरों के लक्षण ये हैं कि उन्हें 104 से 106 एफ तक तेज बुखार आएगा. भूख कम हो जाएगी. पशु सुस्त रहने लगता है. मुंह से बहुत ज्यादा लार टपकना शुरू हो जाती है. मुंह में फफोले हो जाते हैं. खासतौर पर जीभ और मसूड़ों पर फफोले बहुत ज्यादा हो जाते हैं. पशु के पैर में खुर के बीच घाव हो जाते हैं, जो अल्सर होता है. गाभिन पशु का गर्भपात हो जाता है. थन में सूजन और पशु में बांझपन की बीमारी आ जाती है. 

ऐसे जल्दी फैलता है एफएमडी रोग     

दूषित चारा और दूषित पानी पीने से पशुओं में एफएमडी रोग जल्दी फैलता है. बरसात के दौरान खासतौर पर पशु खुले में चरने के दौरान दूषित चारा-पानी खा और पी लेते हैं. खुले में पड़ी कुछ सड़ी-गली चीजें खाने से भी होता है. फार्म पर नए आने वाले पशु से भी ये बीमारी लग जाती है. पहले से ही एफएमडी से पीड़ित पशु के साथ रहने से भी हो जाती है. 

ऐसे करें एफएमडी की रोकथाम 

पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है. इसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन कराएं. उसके कान में ईयर टैग डलवाएं. किसी भी पशु स्वास्य्ले  केन्द्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के टीके लगवाएं. टीका लगवाने के बाद इस बात का खास ख्याल रखें कि टीका लगने पर 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. इसलिए तब तक पशु का खास ख्याल रखें. बरसात के दौरान पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें. 

एफएमडी हो तो ऐसे करें उपचार 

एफएमडी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी उपाय जरूर अपनाए जा सकते हैं. जैसे पीड़ित पशु को बाकी सभी पशुओं से अलग रखें. मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट सॉल्यूशन से धोएं. इसके अलावा बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर उससे पशु के मुंह की सफाई करें. खुर के घावों को पोटेशियम सॉल्यूगशन या बेकिंग सोडा से धोएं. कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं.  

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