Jamnapari Goat: ये हैं वो 15 वजह जिसके चलते पाली जाती हैं यूपी की जमनापरी बकरी 

Jamnapari Goat: ये हैं वो 15 वजह जिसके चलते पाली जाती हैं यूपी की जमनापरी बकरी 

Jamnapari Goat इस खबर में हम आपको यूपी की एक खास नस्ल की बकरी के बारे में बताने जा रहे हैं. यूपी की पहचान बरबरी नस्ल की बकरी से तो है ही, लेकिन जमनापरी का नाम भी बहुत है. जमनापरी दूध के साथ ही अपने स्वादिष्ट मीट के लिए भी जानी जाती है. 

jamnapari goatsjamnapari goats
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 13, 2026,
  • Updated Mar 13, 2026, 8:29 AM IST

बकरी पालन में मीट की डिमांड तो हमेशा से रही है, लेकिन अब बकरी के दूध की डिमांड भी बढ़ रही है. इसके चलते बकरी पालन भी तेजी से बढ़ रहा है. कोई दूध के लिए बकरियां पाल रहा है तो कोई मीट के लिए हेल्दी नस्ल वाले बकरे. लेकिन एक्सपर्ट की मानें तो बहुत सारे ऐसे बकरी पालक हैं जो दूध और मीट के लिए एक ही नस्ल के बकरे-बकरियां पाल रहे हैं. ऐसी ही एक नस्ल है जमनापरी. जमनापरी नस्ल के बकरे-बकरियां दूध और मीट के लिए खास पहचान रखते हैं. 

ये खास नस्ल यूपी की है. लेकिन इसके अलावा मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में भी पाली जाती हैं. ये एक ऐसी हॉर्ड नस्ल है जो किसी भी तरह के मौसम और वातावरण में पल जाती हैं. इसलिए इसे ज्यादातर राज्यों में पाला जाता है. स्वाद के मामले में जमनापरी का मीट बहुत ही स्वादिष्ट माना जाता है. 

जमनापरी बकरे-बकरी का आंकड़ा

केन्द्रीय पशुपालन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक जमनापरी बकरियां पहले नंबर पर यूपी में 7.54 लाख, दूसरे पर मध्य प्रदेश 5.66 लाख, तीसरे पर बिहार 3.21 लाख, चौथे पर राजस्थान 3.09 लाख और पांचवें नंबर पर पश्चिम बंगाल में 1.25 लाख सबसे ज्यादा पाई जाती हैं. देश में दूध देने वाली कुल बकरियों की संख्या 7.5 लाख है. साल 2019 की पशु जनगणना के मुताबिक देश में 149 मिलियन बकरे-बकरी हैं. हालाकि देश में हर साल इसमे 1.5 से दो फीसद का इजाफा भी होता रहता है.  

ये हैं जमनापरी की खासियत 

  • जमनापरी बकरी इटावा, यूपी के चकरनगर और गढ़पुरा इलाके में बहुत पाई जाती हैं. यह इलाका यमुना और चम्बल के बीहड़ वाला है. यहां बकरियों के लिए चराई की अच्छी सुविधा है. यह यूपी की एक खास नस्ल है. 
  • यह देश की लम्बाई में एक बड़े आकार वाली बकरी है. इसके कान भी लम्बे नीचे की ओर लटके हुए होते हैं.  
  • इसका रंग आमतौर पर सफेद होता है. लेकिन कभी-कभी कान और गले पर लाल रंग की धारियां भी होती हैं. 
  • इसकी नाक उभरी हुई होती है और उसके आसपास बालों के गुच्छे होते हैं. 
  • बकरे-बकरी दोनों के पीछे के दोनों पैर के ऊपर लम्बे बाल होते हैं.
  • बकरे और बकरी दोनों में ही सींग पाए जाते हैं. 
  • बकरे का वजन 45 किलो और बकरी का वजन 38 किलो तक होता है. 
  • बकरा 90 से 100 सेमी और बकरी 70 से 80 सेमी ऊंची होती हैं.  
  • जमनापुरी बकरियां अपने 194 दिन के दूधकाल में एवरेज 200 लीटर तक दूध देती हैं.  
  • एक साल में जमनापरी बकरी 21 से 26 किलो तक की हो जाती है.
  • जमनापरी का बच्चा 4 किलो वजन तक का होता है. 
  • 20 से 25 महीने की उम्र पर पहला बच्चा  देती है. 
  • दूध के साथ ही यह मीट के लिए भी पाली जाती है. 
  • केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा लगातार जमनापरी बकरी पर रिसर्च करता है. 
  • देश में जमनापरी बकरियों की कुल संख्या 25.56 लाख है. 
  • प्योर जमनापरी ब्रीड बकरियों की संख्या 11.78 लाख है.  

Meat Production: पश्च‍िम बंगाल नहीं, UP को द‍िया गया मीट उत्पादन में नंबर वन बनने का टॉरगेट 

PDFA: ये हैं 80 और 30 लीटर दूध देकर ट्रैक्टर जीतने वालीं गाय-भैंस, गांव में हो रहा स्वागत

MORE NEWS

Read more!