Animal Care in Summer: तेज गर्मी और लू के थपेड़ों से बीमार हो सकते हैं पशु, बचाने को करें ये उपाय

Animal Care in Summer: तेज गर्मी और लू के थपेड़ों से बीमार हो सकते हैं पशु, बचाने को करें ये उपाय

Animal Care in Summer एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक अगर गाय-भैंस को बाहरी बढ़ते तापमान और तेज गर्म हवाओं के थपेड़ों से बचाना है तो हमे कुछ उपाय अपनाने होंगे. रोजमर्रा की देखभाल में रोजाना अलर्ट बने रहें. ऐसा करने से न पशु लू की चपेट में आएगा और न उसके बीमार पड़ने पर खर्चा करना पड़ेगा. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 22, 2026,
  • Updated May 22, 2026, 3:41 PM IST

गर्मियों में पशु के बीमार होने पर जिस डॉक्टर हीट स्ट्रोक या सन स्ट्रोक बताते हैं असल में वो लू ही होती है. खासतौर से मई-जून में दोपहर के वक्त लू के थपेड़े बहुत चलते हैं. और पशु शेड में हो या पेड़ के नीचे वो ऐसी जगह होते हैं जहां गर्म हवाएं आराम से पहुंचती हैं. यही वजह है कि पशु लू की चपेट में जल्दी आ जाते हैं. यही वो वक्त होता है जब बाहरी तापमान भी 45 डिग्री को पार कर जाता है. तेज गर्मी भी पशु यानि गाय-भैंस को बहुत परेशान करती है. ऐसा भी नहीं है कि लू और तेज गर्मी का कोई इलाज नहीं है. जरूरत है लू की चपेट में आए पशु की लक्षणों से पहचान की जाए, और तुरंत ही इलाज शुरू कर दिया जाए. 

ऐसा करने से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. ध्यान रहे गर्मियों में बढ़ता तापमान और तेज चलती गर्म हवाएं पशुओं के लिए बीमारी की आशंका बढ़ा देती हैं. हीट स्ट्रोक और हीट स्ट्रेस के चलते पशु कई और बीमारियों का शि‍कार हो जाता है. पशु का दूध उत्पादन घट जाता है. बीमार होने पर पशुपालक की लागत बढ़ जाती है. कई बार तो हीट स्ट्रोक इतना खतरनाक हो जाता है कि पशु की मौत तक हो जाती है. 

लू से बचाने के जरूरी उपाय 

पशुओं को धूप और लू से बचाने के लिए हवादार शेड और छायादार पेड़ के नीचे रखें, जहां सीधी धूप पशुओं पर न पड़े. शेड को ठंडा रखने के लिए दीवारों के उपर जूट की टाट लटका कर उसपर थोड़ी-थोड़ी देर पर पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए, जिससे बाहर से आने वाली हवा में ठंढक बनी रहे.

लू लगने की ऐसे करें पहचान 

  • पशु को तेज बुखार आने लगता है. 
  • पशु मुंह खोलकर जोर-जोर से सांस लेता है. 
  • पशु सांस लेने के दौरान हांफते हुए मुंह से लार गिरता है.
  • उत्पादन कम हो जाता है और पशु की बैचेनी बढ़ जाती है. 
  • भूख में कमी और पानी ज्यादा पीने लगता है. 
  • पशु का पेशाब कम हो जाता है या बंद हो जाता है.
  • पशु की धड़कन तेज हो जाती है. 
  • कभी-कभी पशु को अफरा (पेट की खराबी) की शिकायत होती है. 

लू से बचाने के ये हैं उपाय

पंखे या कूलर का पशुओं के बीच खूब इस्तेमाल करें. पशुओं में पानी और नमक की कमी हो जाती है. पशु खाने में दिलचस्पी नहीं लेता है. इसे ध्यान में रखते हुए दिन में कम से कम चार बार साफ, स्वच्छ और ठंडा पानी पिलाना चाहिये. साथ ही संतुलित आहार के साथ-साथ उचित मात्रा में खनिज मिश्रण देना चाहिये. पशुओं खासकर भैंस को दिन में दो-तीन बार नहलाना चाहिए. आहार में संतुलन बनाए रखने के लिए अजोला घास का इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही खुराक में गेहूं का चोकर और जौ की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए. पशुओं को चराई के लिए सुबह जल्दी और शाम में देर से भेजना चाहिए.

पशुओं की लू का ऐसे करें इलाज 

  • पशु के शरीर के तापमान को कंट्रोल करने के लिए पशु को ठंडी जगह पर रखना चाहिए.
  • पशु को पानी से भरे गढ्‌ढे में रखना चाहिए या पूरे शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करना चाहिए. अगर
  • मुमकिन हो तो बर्फ या अल्कोहल पशुओं के शरीर पर रगड़ना चाहिए.
  • ठंडे पानी में तैयार किया हुआ चीनी, भुने हुए जौ का आटा और थोड़ा सा नमक का घोल बराबर पिलाते रहना चाहिए.
  • पशु को पुदीना और प्याज का अर्क बनाकर देना चाहिए.
  • डॉक्टर से बात कर शरीर के तापमान को कम करने वाली दवाई खि‍लाएं.
  • शरीर में पानी और नमक की कमी को पूरा करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट पिलाना चाहिए.
  • पशु की हालात ज्यादा खराब हो तो नजदीक के अस्पताल में संपर्क करना चाहिए. 

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