Dairy Milk: राज्य में दूध क्रांति की इबारत लिखने को बड़ी योजनाओं पर काम कर रहा है मध्य प्रदेश 

Dairy Milk: राज्य में दूध क्रांति की इबारत लिखने को बड़ी योजनाओं पर काम कर रहा है मध्य प्रदेश 

Dairy Milk in MP डेयरी सेक्टर में रोजगार और तरक्की के मौकों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार लगातार अपने राज्य में पशुपालन और डेयरी को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए कई बड़ी योजनाएं भी लागू की जा रही हैं. डेयरी में निवेश के लिए भी लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है. इसी कड़ी में चार और पांच जुलाई को इंडियन डेयरी एसोसिएिशन की ओर से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. 

World Milk DayWorld Milk Day
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 07, 2025,
  • Updated Jul 07, 2025, 12:22 PM IST

Dairy Milk in MP भारत 1998 से विश्वस्तर पर दूध उत्पादन और खपत में सबसे आगे रहा है. इसी के चलते भारत निकट भविष्य में "दुनिया की डेयरी" बनने की राह पर है. मौजूदा वक्त में देश दुनिया के कुल दूध उत्पादन में 24 फीसद की हिस्सेदारी दे रहा है. वहीं पांच फीसद की सालाना बढ़ोतरी भी हो रही है. बीते साल भारत में 24 करोड़ टन दूध का उतपादन हुआ था. बावजूद इसके देश में संगठित क्षेत्र द्वारा सिर्फ 25-30 फीसद दूध की प्रोसेसिंग की जा रही है. ये इस बात का भी संकेत है कि डेयरी सेक्टर में हाई क्वालिटी वाले डेयरी प्रोडक्ट की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बहुत मौके हैं. 

ये कहना है कि इंडियन डेयरी एसोसिएिशन (आईडीए) के प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी का. उनका ये भी कहना है कि दूध को बड़े लेवल पर पूर्ण भोजन के रूप में मान्यता हासिल है. ये भोजन स्वास्थ्य के लिए जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है. पीढ़ियों से डेयरी प्रोडक्ट मानव पोषण का एक मूलभूत हिस्सा रहे हैं, जो स्वास्थ्य लाभ देने के साथ ही बीमारी की रोकथाम में भी मदद करते हैं. 

ये कदम उठा रही है मध्य प्रदेश सरकार 

प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी का कहना है कि मध्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र बहुत ही महत्वपूर्ण मोड़ पर है. राज्य सरकार देश के कई हिस्सों में डेयरी में मिली सफलताओं को अपने यहां दोहराने के लिए डेयरी में विकास को गति देने के लिए तैयार है. राज्य डेयरी फेडरेशन (सांची) को संभालने के लिए मध्य प्रदेश सरकार और एनडीडीबी के बीच नवीनतम समझौता इस लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है. विक्रम विश्वविद्यालय में डेयरी प्रौद्योगिकी डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की दूसरी पहल डेयरी उद्योग के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति विकसित करने में मदद करेगी. भारतीय डेयरी संघ (पश्चिम क्षेत्र) एक शीर्ष निकाय है जो डेयरी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए इस कार्यक्रम में डेयरी पेशेवरों, शिक्षाविदों, उद्योग, किसानों और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाने की कोशि‍श की गई है.

कार्यक्रम का मकसद ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना, डेयरी क्षेत्र में नवाचारों को उजागर करना और राज्य में वास्तविक डेयरी उत्पादों के लिए उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना है. प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और पैनलिस्ट दूध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, चारा और चारा संसाधनों का अनुकूलन करने, स्मार्ट डेयरी फार्मिंग प्रथाओं को लागू करने और अत्याधुनिक उत्पादन तकनीकों को अपनाने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों का पता लगाया गया. चर्चा में एआई, डिजिटलीकरण, विपणन रणनीतियों, सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों और उद्योग के कार्बन पदचिह्न को कम करने पर भी बातचीत हुई. 

डेयरी में मध्य प्रदेश एक नजर में 

मध्य प्रदेश में डेयरी राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो ग्रामीण आजीविका और व्यापक खाद्य उद्योग दोनों में महत्वपूर्ण योगदान देता है. मध्य प्रदेश में डेयरी क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का अवलोकन दिया गया है. मध्य प्रदेश दूध उत्पादन के मामले में भारत में तीसरे स्थान पर है. राष्ट्रीय उत्पादन में लगभग नौ फीसद का योगदान देता है. 2019 पशुधन गणना के अनुसार मध्य प्रदेश में पशुधन की पर्याप्त आबादी है. मवेशियों की बात करें तो देश में (187.5 लाख) में तीसरे स्थान पर और भैंसों (103.5 लाख) में चौथे स्थान पर है.

आईडीए भी इस तरह दे रहा डेयरी सेक्टर को बढ़ावा 

डॉ. सोढ़ी ने बताया कि 1948 में स्थापित, भारतीय डेयरी संघ (आईडीए) भारत में डेयरी उद्योग का शीर्ष निकाय है. इसके सदस्य सहकारी समितियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, कॉर्पोरेट निकायों, निजी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों से हैं. आईडीए भारत में डेयरी के विकास से जुड़े डेयरी उत्पादकों, पेशेवरों और योजनाकारों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों, संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर काम करता है. आईडीए (पश्चिम क्षेत्र) भारत के पांच प्रमुख राज्यों, अर्थात गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से लगा हुआ है. 

ये भी पढ़ें- Fish Farming: कोयले की बंद खदानों में इस तकनीक से मछली पालन कर कमा रहे लाखों रुपये महीना 

ये भी पढ़ें- Cage Fisheries: 61 साल बाद 56 गांव अपनी जमीन पर कर रहे मछली पालन, जानें वजह

MORE NEWS

Read more!