
कुल दूध उत्पादन में भारत विश्व में पहले नंबर पर है. गाय के दूध उत्पादन में भी देश विश्व में पहले नंबर पर है. विश्व के कुल दूध उत्पादन में भारत की 25 फीसद की हिस्सेदारी है. लेकिन इतना सब होने के बाद भी इंटरनेशनल मार्केट में इंडियन डेयरी प्रोडक्ट की डिमांड नहीं है. डेयरी प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट सिर्फ नाम मात्र का है. एशिया और खाड़ी के कुछ ही देश हैं जो भारत के डेयरी प्रोडक्ट खरीदते हैं. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो डेयरी प्रोडक्ट का कम एक्सपोर्ट होने की बड़ी वजह पशुओं की बीमारियां हैं. इन बीमारियों को लेकर विश्वस्तर पर भी सजगता बरती जा रही है. हालांकि वैक्सीनेशन से लेकर बायो सिक्योरिटी तक अपनाकर इन बीमारियों को कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है.
इन सभी बीमारियों में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) को लेकर बहुत ज्यादा चिंता जताई जा रही है. भारत में इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए देश के नौ बड़े राज्यों में सीरो सर्विलांस पर काम चल रहा है. सीरो सर्विलांस की मदद से नौ राज्यों को एफएमडी फ्री बनाने पर काम हो रहा है. राज्यों के एफएमडी फ्री घोषित होते ही यहां के पशुपालक और डेयरी सेक्टर की किस्मत खुल जाएगी. मिल्क प्रोडक्ट एक्सपोर्ट का रास्ता साफ हो जाएगा. पशुपालकों को दूध का अच्छा दाम मिलने लगेगा.
पशुओं में एफएमडी की रोकथाम करना बहुत आसान है. इसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है. सबसे पहले तो अपने पशु का रजिस्ट्रेशन कराएं. उसके कान में ईयर टैग डलवाएं. किसी भी पशु स्वास्थय केन्द्र पर साल में दो बार फ्री लगने वाले एफएमडी के टीके लगवाएं. टीका लगवाने के बाद इस बात का खास ख्याल रखें कि टीका लगने पर 10 से 15 दिन में पशु में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है. इसलिए तब तक पशु का खास ख्याल रखें. बरसात के दौरान पशु के बैठने और खड़े होने की जगह को साफ और सूखा रखें.
एफएमडी का कोई इलाज तो नहीं है, लेकिन कुछ जरूरी उपाय जरूर अपनाए जा सकते हैं. जैसे पीड़ित पशु को बाकी सभी पशुओं से अलग रखें. मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट सॉल्यूशन से धोएं. इसके अलावा बोरिक एसिड और ग्लिसरीन का पेस्ट बनाकर उससे पशु के मुंह की सफाई करें. खुर के घावों को पोटेशियम सॉल्यूगशन या बेकिंग सोडा से धोएं. कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं.
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