
फरवरी का आधे से ज्यादा वक्त बीत चुका है. मौसम एक्सपर्ट की मानें तो आने वाले 10 दिन बाद मौसम पूरी तरह से बदल जाएगा. धूप में तपिश बढ़ने के साथ ही तापमान भी बढ़ जाएगा. तापमान बढ़ने के साथ इंसानों को तो परेशानी होती ही है, साथ में पशु-पक्षी भी परेशान होने लगते हैं. कुछ ऐसी ही परेशानियां पोल्ट्री फार्म में भी आती हैं. इसीलिए कहा जाता है कि 15 फरवरी के बाद का वक्त ये इशारा देता है कि फार्म में खाने-पीने से लेकर शेड मैनेजमेंट तक में बदलाव किया जाए.
अभी से कम से कम दिन के वक्त हल्की तपिश महसूस की जा रही है. वहीं सुबह और शाम की हवा में ठंडक है. अगर बात पोल्ट्री फार्म में पलने वाली मुर्गियों के लिहाज से की जाए तो इस मौसम में उनका बहुत ख्याल रखने की जरूरत है. खासतौर पर अंडा देने वाली मुर्गियां. मौसम सर्दी से गर्मी की ओर बदल रहा हो तो फिर पोल्ट्री फार्म में बदलाव जरूर करने चाहिए. पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक फीड, पीने के पानी से लेकर शेड मैनेजमेंट में बदलाव करना जरूरी हो जाता है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट और मुर्गियों के डॉक्टर एनके महाजन का कहना है कि मौसम में बदलाव आते ही सबसे पहले फीड में बदलाव करने चाहिए. इसके लिए पोल्ट्री फार्मर को कुछ करने की जरूरत नहीं है. बस बाजार से आने वाले फीड में मौसम के हिसाब से थोड़ा बदलाव करना होता है. पीने के पानी का भी बहुत ख्याल रखना चाहिए. पानी न तो बहुत ज्यादा ठंडा हो और न ही ज्यादा गर्म हो. पानी का तापमान 20 से 22 डिग्री तक ही होना चाहिए.
इतना ही नहीं पानी का टीडीएस भी 150 से 200 ही होना चाहिए. क्योंकि अगर टीडीएस को कंट्रोल नहीं किया तो मुर्गियों को आंत की बीमारी और बार-बार दस्त लगने की परेशानी हो सकती है. मुर्गियां जितना दाना खा रही हैं उसका दोगुना पानी पिलाना चाहिए. जैसे मुर्गी अगर 120 ग्राम दाना खा रही है तो उसे 250 एमएल पानी पिलाना चाहिए. शेड में तापमान को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शेड में कम से कम 70 फारेनहाइट और अधिकतम 100 फारेनहाइट होना चाहिए तभी मुर्गियां आराम से रहेंगी. वर्ना मुर्गियां हांफने लगेंगी और उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगेगी.
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