Poultry Feed and Maize: पोल्ट्री और कैटल फीड में मक्का का अच्छा विकल्प है ज्वार, क्यों नहीं हो रही चर्चा

Poultry Feed and Maize: पोल्ट्री और कैटल फीड में मक्का का अच्छा विकल्प है ज्वार, क्यों नहीं हो रही चर्चा

Poultry Feed and Maize पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की मिलेट्स ब्रीडर साइंटिस्ट का कहना है कि मक्का के मुकाबले ज्वार फसल में पानी की भी कम जरूरत होती है. साथ ही किसी भी मायने में ये मक्का से कम नहीं है. और पोल्ट्री फीड में इसका इस्तेमाल करने से अंडे और चिकन के उत्पादन और क्वालिटी पर कोई असर भी नहीं पड़ेगा. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 16, 2026,
  • Updated Feb 16, 2026, 2:55 PM IST

मक्का की सबसे ज्यादा खपत पोल्ट्री फीड में होती है. हालांकि कैटल फीड में भी मक्का इस्तेमाल होती है, लेकिन मात्रा बहुत कम है. दूसरे नंबर पर इथेनॉल में मक्का बड़ी मात्रा में इस्तेमाल की जाती है. ऐसा नहीं है कि पोल्ट्री फीड हो या कैटल फीड, उसे बनाने के लिए मक्का का कोई विकल्प नहीं है. पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की साइंटिस्ट (पीएयू) का कहना है कि फीड के लिए मक्का का विकल्प ज्वार और बाजरा है, लेकिन कोई इस पर चर्चा करने को तैयार नहीं है. पूरा लोड मक्का पर ही है. पोल्ट्री एक्सपकर्ट की मानें तो फीड में करीब 60 से 65 फीसद मक्का का इस्तेमाल होता है. 

यही वजह है कि बीते करीब एक-डेढ़ साल से मक्का को लेकर बाजार में उथल-पुथल मची हुई है. अंडे-चिकन के दाम तो नहीं बढ़े हैं, लेकिन पोल्ट्री फार्मर को जरूर नुकसान उठाना पड़ रहा है. खासतौर पर पोल्ट्री फीड के लिए बाजरा और ज्वार मक्का का अच्छा विकल्प हो सकते हैं. पोषण के मामले में बाजरा और ज्वार किसी भी तरह मक्का से कम नहीं है. इसी तरह कैटल फीड में भी पशुओं को ज्वार खि‍लाई जा सकती है. 

ज्वार संग बाजरा भी दूर करेगा परेशानी

पीएयू की मिलेट्स ब्रीडर साइंटिस्ट डॉ. रूचिका भारद्वाज ने किसान तक को बताया कि बाजरा और ज्वार को पोल्ट्री फीड में शामिल करने से कई परेशानियां दूर हो सकती हैं. पहली बात तो ये कि किसी एक फसल पर डिमांड का लोड नहीं बढ़ेगा. जैसे अभी मक्का पोल्ट्री-कैटल फीड में शामिल है, इथेनॉल बन रहा है, इंडस्ट्रियल सेक्टर में डिमांड होने के साथ ही फूड में भी डिमांड बढ़ती जा रही है. इसलिए जब डिमांड बढ़ेगी तो रेट तो बढ़ना लाजमी ही है. ऐसे में पोल्ट्री फार्मर के लिए बाजरा और ज्वार फायदे का सौदा हो सकती है. बेशक अभी इसका उतना उत्पादन नहीं है जितना मक्का का होता है, लेकिन जब किसानों के पास डिमांड आएगी और रेट सही हो जाएंगे तो उत्पादन भी बढ़ जाएगा. आज बाजरा और ज्वार को एमएसपी भी नहीं मिल रही है. पोल्ट्री फीड में खासतौर पर ब्रॉयलर मुर्गों में ज्वार का इस्तेमाल किया जाता है.  

एक ही टक्कर के हैं मक्का, बाजरा-ज्वार

डॉ. रूचिका भारद्वाज का कहना है कि बाजरा और ज्वार किसी भी तरह मक्का से कम नहीं है. दोनों बराबर का पोषण है. जैसे मक्का में 9.2 ग्राम प्रोटीन होता है, तो बाजरा में 11.8 और ज्वार में 10.4 ग्राम है. इसी तरह मक्का में 26 एमजी कैल्शियम होता है, तो बाजरा में 42 और ज्वावर में 25 एमजी कैल्शियम होता है. अब अगर एनर्जी की बात करें तो मक्का में 358 केसीएएल, बाजरा में 363 और ज्वा‍र में 329 केसीएएल होती है. फैट के मामले में मक्का 4.6 ग्राम, बाजरा 4.8 और ज्वार में 3.1 ग्राम होता है. फाइबर भी मक्का के मुकाबले बाजरा और ज्वार में ज्यादा है. 

क्यों हो रही लाल ज्वार की चर्चा

भारत और अमेरिका के बीच हुई डील के बाद से लाल ज्वार की खूब चर्चा हो रही है. अगर एक्सपर्ट की मानें तो भारत में होने वाली सफेद, हल्की पीली ज्वार और लाल ज्वार में कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं है. सिर्फ थोड़ा सा फर्क टेनिन का है. लाल ज्वार में टेनिन की मात्रा ज्यादा होती है. टैनिन प्रोटीन को बचाने में मदद करता है. पेट फूलने जैसी परेशानी में कमी आती है. फीड में अगर टैनिन है तो मीथेन गैस उत्सर्जन में भी कमी आती है. मीथेन उत्सर्जन के मामले में जुगाली करने वाले पशु गाय-भैंस तीसरे नंबर पर आते हैं.

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