Goat Lamb Care: बदलते मौसम में भी होता है बकरी के बच्चों को निमोनिया, ऐसे करें बचाव 

Goat Lamb Care: बदलते मौसम में भी होता है बकरी के बच्चों को निमोनिया, ऐसे करें बचाव 

Goat Lamb Care सभी पशुओं में बकरी एक ऐसा पशु है जो गर्मियों में बहुत ही कूल रहता है. गर्मी के चलते दूसरे पशुओं का दूध उत्पादन कम हो जाता है, वहीं बकरी के दूध उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है. लेकिन ये भी सच्चाई है कि बकरियों के बच्चों को ज्यादा गर्मी और बदलता मौसम नुकसान पहुंचाता हैं. जैसे नॉर्थ इंडिया में बकरियों के बच्चों में सबसे ज्यादा मृत्यु दर देखी गई है. क्योंकि यहां गर्मी और सर्दी के मौसम में बड़ा उलटफेर होता है.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 16, 2026,
  • Updated Feb 16, 2026, 11:13 AM IST

इंसान हों या पशु, हर जगह यही माना जाता है कि सर्दियों में ही निमोनिया जैसी परेशानी होती है. लेकिन ये गलत है. पशु छोटा यानि भेड़-बकरी हो या फिर बड़ा पशु जैसे गाय-भैंस उन्हें बदलते मौसम और गर्मियों में भी निमोनिया होता है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के साइंटिस्ट का कहना है कि खासतौर पर बकरी के बच्चों के लिए निमोनिया बहुत ही ज्यादा खतरनाक और जानलेवा होता है. अगर निमोनिया के दौरान जरा सी भी लापरवाही हुई तो बकरी के बच्चे की मौत तक हो सकती है. 

इसलिए ऐसे वक्त में ये बहुत जरूरी हो जाता है कि बदलते मौसम और गर्मियां शुरू होने से पहले बच्चों के शेड (आवास) में बदलाव शुरू कर दें. सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि जब बकरियों के बच्चों में निमोनिया होता है तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है. बुखार आने लगता है. इतना ही नहीं उनकी नाक भी बहने लगती है. बकरी पालक इन लक्षणों को अच्छी तरह से पहचानते हैं. इसलिए लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी न करें. 

बच्चों पर ऐसे होता है निमोनिया का असर

साइंटिस्ट डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि हमारे देश में जब भी मौसम परिवर्तन होता है तो अचानक से होता है. जैसे अगर गर्मियां शुरू होती हैं तो तापमान अचानक तेजी के साथ बढ़ने लगता है. ऐसे मौसम में खासतौर पर बकरी के बच्चे अपने को उस मौसम में नहीं ढाल पाते हैं. जिसके चलते वो निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं. निमोनिया शुरू होते ही उन्हें बुखार आने लगता है, नाक बहती है और सांस लेने में परेशानी होती है. जैसे ही यह लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही डॉक्टर के पास ले जाएं. जब तक डॉक्टर दवाई खिलाने की कहे तो बकरी के बच्चे को लगातार बिना गैप के उसे दवाई खिलाएं. 

निमोनिया से ऐसे बचाएं बच्चों को  

डॉ. अशोक कुमार ने गर्मी के इस मौसम में बचाव के लिए टिप्स देते हुए कहा कि गर्मी शुरू होते ही सबसे पहले तो बकरी पालक को बकरियों के आवास में बदलाव करना चाहिए. बकरियों के शेड को इस तरह से ढक दें कि उसमे गर्म हवाएं आसानी से न आएं. दूसरा यह कि दोपहर एक बजे से चार बजे तक बकरियों और उनके बच्चों को चराने न ले जाएं. सुबह और शाम में ही बकरियों को चराने ले जाएं. पानी खूब पिलाएं. ध्यान रहे कि मौसम के चलते पानी गर्म न हो. क्योंकि गर्मी के मौसम में बकरियों के चरने के वक्त में कमी आ जाती है तो उन्हें शेड में ही भरपूर चारा दें. कोशिश करें कि इस दौरान बकरियों और उनके बच्चों को पूरा न्यूट्रिशन दें. इसके लिए चाहें तो पैलेट्स फीड भी खिला सकते हैं.  

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