संसद में जानकारी: KCC से जुड़े 50 लाख से अधिक पशुपालक, दूध उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर

संसद में जानकारी: KCC से जुड़े 50 लाख से अधिक पशुपालक, दूध उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर

देश के पशुपालन क्षेत्र में संस्थागत ऋण, दूध उत्पादन, वैज्ञानिक प्रजनन और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी प्रगति दर्ज की गई है. किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पशुपालकों की संख्या बढ़कर 50.42 लाख पहुंच गई है, जबकि देश का वार्षिक दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Aug 12, 2026,
  • Updated Aug 12, 2026, 11:23 AM IST

देश के पशुपालन क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान संस्थागत ऋण, दूध उत्पादन, वैज्ञानिक प्रजनन और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा सुधार देखने को मिला है. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मंगलवार को संसद में बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत पशुपालकों की संख्या बढ़कर 2025-26 में 50.42 लाख हो गई है.

मंत्री के अनुसार वर्ष 2021-22 में पशुपालन क्षेत्र में केवल 15.08 लाख किसान ही केसीसी योजना से जुड़े थे. चार वर्षों में यह संख्या तीन गुना से अधिक बढ़कर 50.42 लाख पहुंच गई है. इससे साफ है कि पशुपालकों की संस्थागत ऋण तक पहुंच तेजी से बढ़ी है और उन्हें औपचारिक वित्तीय प्रणाली का लाभ मिल रहा है.

दूध उत्पादन में नया रिकॉर्ड

देश का वार्षिक दूध उत्पादन वर्ष 2024-25 में 247.87 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो घरेलू मांग के अनुमानित 243 मिलियन टन से अधिक है. इससे भारत की डेयरी क्षमता और उत्पादन क्षमता का पता चलता है.

वहीं, वर्ष 2025-26 में डेयरी उत्पादों का निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन में निरंतर वृद्धि और बेहतर पशुधन प्रबंधन से भविष्य में डेयरी क्षेत्र की निर्यात क्षमता और मजबूत हो सकती है.

राष्ट्रीय गोकुल मिशन से स्वदेशी नस्लों पर जोर

केंद्र सरकार दिसंबर 2014 से राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) संचालित कर रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी गोवंश नस्लों का संरक्षण और विकास, पशुधन की आनुवंशिक क्वालिटी में सुधार और दूध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना है.

योजना के माध्यम से डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके और बेहतर नस्ल के पशुओं का विकास हो.

राष्ट्रीय पशुधन मिशन से मिल रहा बढ़ावा

वर्ष 2014-15 से लागू राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत वैज्ञानिक पशु एवं पोल्ट्री प्रजनन, चारा विकास, उद्यमिता और प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

इस योजना का उद्देश्य रोजगार सृजन के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के पशुपालकों को संगठित बाजारों से जोड़ना भी है. योजना के तहत व्यक्तिगत उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्वयं सहायता समूहों (SHG), संयुक्त देयता समूहों, सहकारी संस्थाओं और सेक्शन-8 कंपनियों को पात्र गतिविधियों के लिए 50 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है.

योजना में नस्ल सुधार, चारा विकास, अनुसंधान एवं विकास, पशुधन बीमा और विस्तार सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है.

पशु रोग नियंत्रण पर विशेष जोर

पशुओं में होने वाली आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) को भी विस्तार दे रही है.

इस कार्यक्रम के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुरपका-मुंहपका रोग (FMD), ब्रूसेलोसिस, पीपीआर और क्लासिकल स्वाइन फीवर (CSF) जैसी बीमारियों के टीकाकरण के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाती है.

इसके अलावा अन्य पशु रोगों के नियंत्रण, उभरती बीमारियों की रोकथाम, प्रयोगशालाओं को मजबूत करने, रोग निगरानी, प्रशिक्षण और जागरुकता कार्यक्रमों के लिए भी सहायता दी जाती है.

तमिलनाडु में 245 मोबाइल वेटरनरी यूनिट

केंद्र सरकार तमिलनाडु में 245 मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU) के संचालन के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करा रही है. इन मोबाइल इकाइयों के माध्यम से पशुपालकों को उनके गांवों तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं.

इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से उन क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जहां स्थायी वेटनरी हॉस्पिटल आसानी से उपलब्ध नहीं हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

केंद्र सरकार का मानना है कि संस्थागत ऋण, वैज्ञानिक प्रजनन, बेहतर चारा प्रबंधन, रोग नियंत्रण और घर-घर पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त प्रयासों से पशुधन की उत्पादकता बढ़ेगी. इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश का पशुपालन क्षेत्र अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकेगा.

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