Fish Pond Care: अभी करें मछलियों के तालाब में ये काम, मई-जून तक खूब होगा फायदा 

Fish Pond Care: अभी करें मछलियों के तालाब में ये काम, मई-जून तक खूब होगा फायदा 

Fish Pond Care मछलियों के तालाब में पानी की तरफ से की गई जरा सी भी अनदेखी मछली पालक को बड़ा नुकसान पहुंचाती है. प्रदूषित पानी से मछली में कई तरह की बीमारी हो जाती हैं. पानी में कई ऐसे जीव-जन्तु  पैदा हो जाते हैं जो मछलियों को नुकसान पहुंचाते हैं. पानी में प्रदूषण बढ़ने से ऑक्सीजन की कमी भी होने लगती है. 

बिहार में तालाब निर्माण पर मिल रही सब्सिडी (सांकेतिक तस्वीर)बिहार में तालाब निर्माण पर मिल रही सब्सिडी (सांकेतिक तस्वीर)
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 13, 2026,
  • Updated Apr 13, 2026, 11:43 AM IST

मछली पालन के लिए जितना महत्व पानी का है तो उतना ही या फिर उससे ज्यादा धूप का भी है. मछलियों के तालाब के पानी की अच्छी हैल्थ बहुत हद तक धूप पर भी निर्भर करती है. आक्सीजन का कम या ज्यादा होना भी कई बार धूप पर निर्भर हो जाता है. इसलिए फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि मछलियों के तालाब में पानी की हैल्थ अच्छी नहीं है तो न मछलियों की ग्रोथ होगी और न ही वो हेल्दी रहेंगी. तालाब के पानी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए जरूरी है कि पानी पर सूरज की सीधी धूप पड़े. तालाब के पानी पर पड़ने वाली सूरज की सीधी धूप एक खास तरह के प्रदूषण को पनपने नहीं देती है.

इसलिए कहा जाता है कि मछली पालन का मुनाफा इस पर निर्भर करता है कि तालाब के पानी को साफ रखने के लिए कितने उपाय अपनाए जा रहे हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक सबसे बेहतर तालाब में मछली पालन माना गया है. कम खर्च में ज्यादा मछलियां पल जाती हैं. तालाब में मछलियों की देखभाल भी अच्छी तरह से हो जाती है. और अगर देखभाल सही तरीके से की जाए तो मछलियों में बीमारी भी कम होती है.

मछली के तालाब में अभी करें ये काम 

  • मछली पालन के लिए तालाब बनाने की सही जगह का चुनाव करना चाहिए. 
  • अप्रैल में मछलियों के पुराने तालाबों की मरम्मत करनी चाहिए. 
  • अप्रैल में नये तालाबों का निर्माण कार्य शुरू कर देना चाहिए.
  • मत्स्य बीज उत्पादक ग्रास कार्प का ब्रिडिंग हैचरी में शुरू करें दें.
  • बदली (बरसात) के दिनों के दौरान ऑक्सीजन की कमी हो सकती है. 
  • मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए पोटाशियम परमेग्नेट का इस्तेमाल करें. 
  • 400 ग्राम प्रति एकड़ प्रति मीटर पानी की गहराई के हिसाब से इस्तेमाल करें.
  • तालाब में आर्गुलस एवं जलीय कीड़ों का संक्रमण हो जाता है. 
  • संक्रमण होने पर कीड़ा मारने वाली दवा, जैविक एवं रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल करें. 
  • हैचरी संचालक, मत्स्य बीज उत्पादक नर-मादा प्रजनक मछलीयों का अलग-अलग तालाब में 15 दिन से एक महीनों के लिए रखें. 
  • तालाब में जलीय कीटों, खरपतवार और अवांछनीय मछलियों की सफाई समय-समय पर कराते रहना चाहिए.
  • अप्रैल में तालाब में कॉमन कार्प मत्स्य बीज का संचय करना चाहिए.
  • तालाब में मत्स्य बीज संचय से पहले 150-250 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बुझे हुए चूने का इस्तेमाल करें.
  • प्लैंकटॉन नेट से नर्सरी, तालाब के पानी में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता की जांच करानी चाहिए.
  • तालाब में जाल चलवाकर संचित मत्स्य बीज की प्रगति और स्वास्थ्य की जांच करते रहना चाहिए. 
  • तालाब में पूरे वर्ष कम से कम 1.5 मीटर पानी का स्तर बना रहे ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए.
  • महीने के आखिर में तालाब में जाल चलाएं (पंगेशियस मछली के तालाब को छोड़कर).

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