Badri Cow Survey: पूरा हुआ बद्री गायों का सर्वे, जल्द ही आसानी से हर जगह मिलेगा घी 

Badri Cow Survey: पूरा हुआ बद्री गायों का सर्वे, जल्द ही आसानी से हर जगह मिलेगा घी 

Badri Cow Survey केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत उत्तराखंड कोआपरेटिव डेरी फेडरेशन (यूसीडीएफ) ने बद्री गायों की नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने संबंधी ये सर्वे चलाया गया है. उत्तराखंड के चार जिलों नैनीताल, चंपावत, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में ये प्रोजेक्ट पूरा किया गया है. सर्वे का डेटा सीधे भारत सरकार के संबंधि‍त विभाग को भेज दिया गया है. 

Badri CowBadri Cow
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 10, 2026,
  • Updated Apr 10, 2026, 11:21 AM IST

बद्री गाय के दूध से बने घी को बहुत सारे फायदेमंद गुणों से भरपूर माना जाता है. बहुत सारे एक्सपर्ट तो इसे घी कम दवाई ज्यादा मानते हैं. यही वजह है कि उत्तराखंड सरकार केन्द्र सरकार के साथ मिलकर एक सर्वे कर रही है. इसका फायदा ये होगा कि इससे बद्री गायों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी. और गाय बढ़ेंगी तो दूध उत्पादन भी बढ़ेगा और ज्यादा से ज्यादा घी की डिमांड को पूरा किया जा सकेगा. जानकारों का कहना है कि सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है. 4 शहरों में 20 पॉइंट पर हुए सर्वे में डाटा जमा कर लिया गया है. अब इस सर्वे के हिसाब से आगे के काम शुरू किए जाएंगे. इसका मकसद बस इतना ही है कि बद्री गाय की नस्ल सुधार कर ज्यादा से ज्यादा घी की डिमांड को पूरा‍ किया जाए.

गौरतलब रहे बद्री गाय हर रोज डेढ़ से दो लीटर तक दूध देती है. इसके दूध में ए2 होता है. वहीं प्रोटीन की मात्रा भी खूब होती है. इसी को देखते हुए बद्री गाय की नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उत्तराखंड में ये खास प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. बीते साल ही मदर डेयरी ने उत्तराखंड कोआपरेटिव डेरी फेडरेशन (यूसीडीएफ) के साथ मिलकर अभी बिक रहे घी के साथ ट्रेसेबिलिटी सिस्टम को भी जोड़ दिया है. 

ऐसे पूरा किया गया है बद्री गायों का सर्वे

  • मिल्क रिर्काडिंग का काम ऐसी बद्री गायों पर किया जा रहा है जिनका पूर्व ब्यांत में दूध उत्पादन 3.5 लीटर प्रतिदिन से ज्यादा हो.
  • मिल्क रिर्काडर के लिए ऐसे युवाओं का चयन किया गया जो स्थानीय, शिक्षित, बेरोजगार हैं. 
  • गांवों की भौगोलिक स्थिति के अनुसार मिल्क रिकार्डर्स की संख्या का निर्धारण किया गया. 
  • चुने गए गांवों में बद्री गायों की पहचान 12 डिजिट के यूनिक आईडेटिफिकेशन टैग से की गई है.
  • पशुपालक और पशु का पंजीकरण इनाफ साफ्टवेयर पर किया गया है. 
  • एक मिल्क रिकार्डर द्वारा एक दिन में पांच बद्री गायों की मिल्क रिर्काडिंग की गई है.
  • बद्री गाय के ब्याने के पांचवें दिन से 25वें दिन के अन्दर पहली मिल्क रिर्काडिंग की गई है. 
  • गाय की मिल्क रिकॉर्डिंग हर महीने एक तय तारीख को सुबह-शाम हुई है. 
  • मिल्क रिकॉर्डिंग हर महीने की तय तारीख को दूध दुहान की जगह पर की गई है. 
  • गाय की कम से कम 16 रिर्काडिंग और अधिकतम 20 रिकार्डिंग (सुबह-शाम) की गई हैं. 
  • परियोजना के तहत 20 मिल्क रिकार्डिंग (सुबह-शाम) या पशु के दूध सूखने तक की गई हैं.
  • मिल्क रिकार्डिंग पशु का विवरण, रिकार्डिंग का विवरण, पशुपालक का पता, गांव का नाम, मिल्क रिर्काडिंग की तारीख और समय नोट किया गया है.
  • सर्वे के लिए 45 मिल्क रिकार्डिंग सेंटर खोले गए थे. 
  • सभी बद्री गायों की जियो टैगिंग की गई है. 
  • सर्वे का डाटा सीधे भारत सरकार को भेजा गया है. 
  • सभी चार जिलों में 3240 बद्री गायों पर सर्वे किया गया है. 

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