
दूध उत्पादन के मामले में यूपी देश में पहले नंबर पर है. बीते कुछ साल में ही दूध उत्पादन में 40 फीसद की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद भी दूध उत्पादन में अभी और संभावनाएं हैं. लेकिन पशुपालन में सबसे बड़ी परेशानी हरे चारे की हो रही है. हरे चारे के चलते पशुपालकों की लागत बढ़ रही है. लागत बढ़ने और मुनाफा कम होने के चलते पशुपालन ज्यादा बढ़ नहीं रहा है. लेकिन यूपी सरकार ने इसका भी रास्ता निकाल लिया है.
अब आने वाले वक्त में पशुपालकों को हरे चारे की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. यहां तक की पूरे साल के लिए हरे चारे को स्टोर भी कर सकेंगे. गौरतलब रहे हाल ही में यूपी सरकार ने हरे चारे के संबंध में एक आंकड़ा जारी किया है. छुट्टा घूमने वाले पशुओं को हरे चारे की कमी न हो, इसके लिए शत-प्रतिशत गोचर और चारागाह की जमीन को इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है.
चारा एक्सपर्ट की मानें तो हरा चारा स्टोर करने और उसका साइलेज बनाने के लिए उसके पत्तों को पहले सुखा लें. लेकिन ख्याल रहे कि जिस चारे को हम साइलेज बनाने जा रहे हैं उसे पकने से कुछ दिन पहले ही काट लें. इसके बाद उसे धूप में सुखाने रख दें. लेकिन चारे को सुखाने के लिए कभी भी उसे जमीन पर डालकर न सुखाएं. चारा सुखाने के लिए जमीन से कुछ ऊंचाई पर जाली वगैरह रखकर उसके ऊपर चारे को डाल दें.
इसे लटका कर भी सुखाया जा सकता है. क्योंकि जमीन पर डालने से चारे पर मिट्टी लगने का खतरा रहेगा जो फंगस आदि की वजह बन सकती है. जब चारे में 15 से 18 फीसद के आसपास नमी रह जाए तो उसे सूखी जगह पर रख दें. इस बात का ख्याल रहे कि अगर चारे में नमी ज्यादा रह गई तो उसमे फंगस आदि लग जाएंगे और चारा खराब हो जाएगा. इतना ही नहीं इस खराब चारे को गलती से भी पशु ने खा लिया तो वो बीमार हो जाएगा.
चारा एक्सपर्ट का कहना है कि बहुवर्षीय हरी घास से भी हे आसानी से बनाया जा सकता है. लेकिन जरूरत है बस थोड़ी सी जागरुकता की. जैसे फसल को पकने से पहले ही काट लें. उसके बाद उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें. उन्हें तब तक सुखाएं जब तक उनमे 15 से 18 फीसद तक नमी ना रह जाए.
हे के लिए हमेशा पतले तने वाली फसल का चुनाव करें. क्योंकि पतले तने वाली फसल जल्दी सूखेगी. कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है. यानि चारे का तना टूटने लगे इसके बाद इन्हें अच्छी तरह से पैक करके इस तरह से रख दें कि चारे को बाहर की हवा न लगे.
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