Hitech Slaughtering: मशीन से कटा बकरा और मुर्गा भी है हलाल, फैलाई जा रही है अफवाह

Hitech Slaughtering: मशीन से कटा बकरा और मुर्गा भी है हलाल, फैलाई जा रही है अफवाह

Hitech Slaughtering सिर्फ मीट ही नहीं खाने-पीने की वस्तु समेत इस्तेमाल करने वाली चीजों पर हलाल का नियम लागू होता है. लेकिन, अगर मीट की बात करें तो इस पर हलाल के नियमों को लेकर बहुत बारिकी से नजर रखी जाती है, खासतौर पर भारत में. सोशल मीडिया समेत दूसरी जगहों पर भी ऐसा भ्रामक प्रचार किया जाता है कि मशीन से होने वाली स्लॉटरिंग का मीट हलाल नहीं होता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 08, 2026,
  • Updated Apr 08, 2026, 1:38 PM IST

आमतौर पर ये सोचा जाता है कि सिर्फ मीट प्रोडक्ट ही हलाल और झटके के दायरे में आते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. खाने-पीने के, शरीर पर इस्तेमाल करने के जैसे साबुन, क्रीम और शैम्पू आदि भी हलाल के दायरे में आते हैं. अभी तक बाजार में दुकान पर फ्रेश मीट बिकता था. लेकिन अब बाजार में फ्रोजन और चिल्ड भी आ गया है. खासतौर पर बकरा, चिकन और मछली चिल्ड-फ्रोजन की पैकिंग में खूब बिक रही हैं. इसकी कटिंग मशीनों से होती है. लेकिन कुछ लोग अफवाह उड़ा रहे हैं कि मशीन से कटने वाले बकरे का मीट और चिकन हलाल नहीं होता है. लेकिन ये सरासर गलत है. मीट सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट इसे सिरे से खारिज करते हैं. 

यहां तक की फ्रोजन और चिल्ड मीट-चिकन बेचने वालों को हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली कंपनियां भी इस कोरी अफवाह करार देते हुए नकार रही हैं. उनका दावा है कि हलाल के नियमों को लेकर बहुत बारिकी से नजर रखी जाती है, खासतौर पर भारत में. इस तरह की अफवाहें सिर्फ सोशल मीडिया उपजती है. सोशल मीडिया पर ऐसे लोग ये दावा करते हैं जिन्हें हाईटेक तरीके से होने वाली स्लॉटरिंग के बारे में बेसिक जानकारी भी नहीं होती है. 

3.45 मिनट है हलाल का नियम 

स्लॉटरिंग और चिकन प्रोसेसिंग यूनिट से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि हलाल सर्टिफिकेट के मुताबिक एक मुर्गे को काटने के बाद 3.45 मिनट तक हवा में लटका कर रखना होता है, जिससे की उस मुर्गे का ब्लड पूरी तरह से बाहर निकल जाए. इसलिए मशीन की टाइमिंग इस तरह सेट की जाती है कि मुर्गा काटने के बाद तय वक्त तक मशीन के हैंगर से हवा में ही घूमता रहता है. जब टाइम पूरा हो जाता है तो उसे अगली प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाता है. हलाल के इन सभी नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं, ये देखने के लिए हलाल कमेटी के एक्सपर्ट यूनिट का दौरा करते रहते हैं. मशीन की टाइमिंग को भी चेक करते हैं. 

मुस्लि‍म कारीगर हो तो मिलेगा सर्टिफिकेट 

एक्सपर्ट का कहना है कि मुर्गे को काटने के लिए मुस्लिम स्टाफ रखा जाता है. ये कर्मचारी हलाल नियमों के मुताबिक छूरी की मदद से हाथ से ही मुर्गे की गर्दन काटता है. इस दौरान ये कर्मचारी पूरी तरह से हलाल के नियमों का पालन करता है. बिना इस नियम का पालन किए हलाल का सर्टिफिकेट नहीं मिलता है. 

दूध को भी दिया जाता है हलाल सर्टिफिकेट 

हरियाण की वीटा डेयरी हलाल दूध भी बेचती है. लेकिन ये सारा दूध एक्सपोर्ट होता है. इंडोनेशिया और मलेशिया की कंपनी ह दूध खरीदती हैं. लेकिन इस सौदे पर आखिरी मुहर तभी लगती है जब हम उन्हें हलाल दूध का सर्टिफिकेट दिखाया जाता है.  

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