Biogas Plant: पोल्ट्री फार्म में बायोगैस प्लांट बनाने की तैयारी, सरकार से मांगी 60 फीसद सब्सिडी 

Biogas Plant: पोल्ट्री फार्म में बायोगैस प्लांट बनाने की तैयारी, सरकार से मांगी 60 फीसद सब्सिडी 

Biogas Plant बायोगैस सिर्फ गोबर ही नहीं मुर्गियों की बीट (मैन्योर) से भी बन सकती है. इसी की कोशि‍श पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) कर रही है. पीएफआई ने इसके लिए केन्द्र सरकार से भी योजना के तहत मदद मांगी है. अगर ऐसा होता है तो इससे एक नहीं तीन-तीन बड़े काम होंगे. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Apr 10, 2026,
  • Updated Apr 10, 2026, 9:43 AM IST

ईरान-अमेरिका और इजराइल की लड़ाई ने बहुत सारे सेक्टर को सोचने पर मजबूर कर दिया है. ऐसा ही एक पोल्ट्री सेक्टर. प्रोटीन की कमी को दूर करने में ये सेक्टर अंडे और चिकन का उत्पादन कर बड़ा योगदान दे रहा है. लेकिन जल्द ही पोल्ट्री सेक्टर तीन और बड़े काम करने जा रहा है. अब छोटा हो या बड़ा पोल्ट्री फार्म गैस भी बनाएगा. इसके साथ ही पर्यावरण और हैल्थ को सुधारने का काम भी करेगा. इसके लिए तैयारियां चल रही हैं. 

हाल ही में पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) का एक डेलीगेशन केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री से मिला था. डेलीगेशन की मांग है कि उन्हें पोल्ट्री फार्म में बायोगैस प्लांट बनाने के लिए 60 फीसद सब्सिनडी दी जाए. क्योंकि प्लांट लगने के बाद तीन बड़े फायदे होंगे. इसके पीछे पीएफआई का तर्क है कि बायोगैस प्लांट पोल्ट्री कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए एक टिकाऊ और वैज्ञानिक समाधान देता है. 

हर घंटे बनेगी 750 किलोवॉट बिजली

पीएफआई का एक डेलीगेशन हाल ही में प्रेसिडेंट रनपाल ढांडा के नेतृत्व में केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल से मिला था. रनपाल ढांडा ने मांग की है कि पोल्ट्री फार्म में बायोगैस प्लांट बनाने के लिए 60 फीसद की सब्सिाडी दी जाए. क्योंकि अभी योजना के तहत 20 फीसद सब्सिाडी दे रही है. प्लांट की लागत को देखते हुए ये नाकाफी साबित हो रही है.

भारत सरकार का नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ये सब्सिुडी दे रहा है. रनपाल ढांडा ने बताया कि पोल्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक 50 हजार मुर्गियों की क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म में लगने वाला बायोगैस प्लांट हर रोज 750 किलोवॉट बिजली हर घंटे बनाएगा. और इसकी लागत 1.45 करोड़ रुपये आएगी.

इसमे भारत सरकार का ऊर्जा मंत्रालय 26 लाख रुपये की सब्सिडी दे रहा है. ये 20 फीसद से भी कम सब्सिेडी है. ये उतनी उत्साहजनक नहीं है जिससे ज्यादा से ज्यादा पोल्ट्री फार्मर बायोगैस प्लांट लगाने को तैयार हों. इसीलिए 60 फीसद की मांग की जा रही है. 

प्लांट से ये होंगे तीन बड़े फायदे 

रनपाल ढांडा ने किसान  तक को बताया कि किसी भी छोटे-बड़े पोल्ट्री फार्म से निकलने वाली बीट का निस्तारण करना टेड़ा काम होता है. तो बायोगैस प्लांट बनने से आसपास साफ-सफाई रहेगी. इससे गैस और बिजली बनाई जा सकेगी. बिजली-गैस बनने के बाद बचने वाली स्लरी खेतों में आएगी. ये सब होने से मिट्टी और इंसानों की हैल्थ में भी सुधार होगा. और इसके साथ-साथ पोल्ट्री फार्मर को कुछ रुपयों का मुनाफा भी होगा. अगर कोई पोल्ट्री फार्मर अपने खेत में पोल्ट्री फीड के लिए मक्का उगा रहा है तो उसे एक अच्छी खाद घर बैठे ही मिल जाएगी. 

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