
ऐसे पशु जिनके पैरों में खुर हैं और दो खुर के बीच में अंतर (गैप) है तो उनके लिए खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी बहुत खतरनाक मानी जाती है. ये पशुओं के लिए जानलेवा बीमारी तो है ही, साथ में उत्पादन पर भी असर डालती है. गाय-भैंस, भेड़-बकरी आदि पशु इसकी चपेट में जल्दी और ज्यादा होते हैं. एफएमडी बीमारी देश ही नहीं विदेशों में भी डेयरी और पशुपालन सेक्टर के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है. एफएमडी से निपटने के लिए देश में अगले चरण की एफएमडी वैक्सीनेशन (टीकाकरण) ड्राइव शुरू हो गई है.
एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कुछ राज्य ऐसे हैं जहां वैक्सीनेशन का छठा चरण चल रहा है, वहीं कई राज्य ऐसे भी हैं जहां सातवां और आठवां दौर चल रहा है. एक्स्पर्ट का कहना है कि एफएमडी बीमारी की रोकथाम के लिए ये जरूरी है कि हमे उसके लक्षण पता हों. साथ ही उसके फैलने की वजह पता हों जिससे उन्हें कंट्रोल किया जा सके. साथ ही अगर किसी पशु को ये बीमारी हो जाए तो उस वक्त क्या करना चाहिए इस बात की जानकारी भी होना बहुत जरूरी है.
एनिमल एक्सपर्ट डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि एफएमडी दुधारू पशु गाय-भैंस, भेड़-बकरी में तो होती है साथ में घोड़े जैसे पशुओं में भी होती है. इसीलिए इसके लक्षणों की पहचान करना बहुत जरूरी है. क्योंकि जैसे ही आप लक्षण पहचान लेंगे तो उसे फैलने से रोकने के लिए जरूरी उपाय भी अपना लेंगे.
डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि बहुत आसान तरीकों से पशुओं में एफएमडी की रोकथाम की जा सकती है. ये वो उपाय हैं जिसमे कोई पैसा भी खर्च नहीं होता है.
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