Animal Care: जून तक गाय-भैंस की ऐसे करें देखभाल, न होगी बीमारी और न घटेगा दूध 

Animal Care: जून तक गाय-भैंस की ऐसे करें देखभाल, न होगी बीमारी और न घटेगा दूध 

Animal Care एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो खासतौर पर मई-जून की दोपहरी के वक्त पशुओं को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. अगर इस दौरान पशुओं की देखभाल में जरा सी भी लापरवाही बरती गई तो पशु की जान भी जा सकती है. साथ ही दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. ऐसे में पशुपालक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 15, 2026,
  • Updated May 15, 2026, 2:59 PM IST

मौसम पूरी तरह से गर्म हो चुका है. धूप में तपिश के साथ ही लू भी चलने लगी है. हालांकि बीच-बीच में चलने वाली आंधी और बारिश की बूंदें मौसम को कुछ वक्त के लिए ठंडा कर देती हैं. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इस तरह का मौसम पशुओं के लिए और भी ज्यादा नुकसानदायक होता है. इसलिए ये बहुत जरूरी हो जाता है कि मौसम के हिसाब से सुबह-शाम पशुओं की देखभाल की जाए. खासतौर से जून तक. क्योंकि तापमान में बढ़ोतरी और लू के थपेड़े जून तक चलते हैं. उसके बाद मौसम बदलने लगता है. लेकिन मई-जून के दौरान बढ़ती गर्मी पशुओं को बहुत परेशान करती है. 

लू चलने पर गाय-भैंस एकदम से असहज हो जाती हैं. इस दौरान पशु हीट स्ट्रेस में भी आ जाते हैं. कई दूसरी बीमारियां भी इसी मौसम में पशुओं पर अटैक करती हैं. एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक गर्मियों के मौसम में अगर वक्त रहते पशुओं के बाड़े में कुछ जरूरी उपाय अपना लिए जाएं तो पशुओं को बीमारी और मौत के जोखि‍म से बचाया जा सकता है. साथ ही पशुपालक को भी परेशानी और आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है.  

पशुओं की देखभाल रखें ये ख्याल  

  • गाय-भैंस के हीट में आने पर वक्त रहते गाभिन कराएं. 
  • पशु को दोपहर के वक्ते सीधे तौर पर तेज धूप से बचाएं. 
  • खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए टीके लगवाएं.
  • डॉक्टर की सलाह पर पशु पेट के कीड़ों की दवाई खिलाएं.
  • गेहूं के भूसे की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए उसमे यूरिया मिलाएं. 
  • दूध निकालने के बाद थन कीटाणु नाशक घोल में डुबोकर साफ करें.
  • दुधारू पशुओं को थैनेला रोग से बचाने के लिए डाक्टर की सलाह लें. 
  • सुबह-शाम गर्भवती और बीमार पशुओं को टहलाने ले जाएं.
  • पशुओं को साफ और ताजा पानी पिलाएं, ठंडा पानी ना दें.
  • सुबह-शाम पशुओं को ताजा पानी से नहलाएं. 
  • पशुओं का बाड़ा हवादार होना चाहिए.
  • बाड़े में रेत-मिट्टी का कच्चा फर्श हो. 
  • बाड़े में सीलन नहीं होनी चाहिए. 

जब पशुओं का पेट खराब हो जाए

पशुओं को अफरा होने पर 500 ग्राम सरसों तेल के साथ 50 ग्राम तारपीन का तेल दें.
पशु की सेहत और दूध बढ़ाने के लिए 50-60 ग्राम मिनरल मिक्चर दें. 
हरे चारे की कमी दूर करने को गेहूं कटते ही ज्वार, मक्का, लोबिया की बुआई करें.

ये भी पढ़ें- केंद्र के आंकड़ों में 'जीरो' है मध्य प्रदेश की गेहूं खरीद, पढ़ें बाकी राज्यों का हाल

ये भी पढ़ें- पशुपालकों और पर्यावरण तक के लिए ऐसे फायदेमंद है वाइट रेवोलुशन-2

MORE NEWS

Read more!