
26 या 27 मई को बकरीद मनाई जा सकती है. तीन दिन तक कुर्बानी का ये त्यौहार मनाया जाता है. तीन दिन तक बकरों की कुर्बानी दी जाती है. ज्यादातर मुसलमान एक बकरे की कुर्बानी करते हैं. कुछ ऐसे भी होते हैं जो दो से 10 बकरों तक की कुर्बानी करते हैं. तीनों में से किसी भी दिन कुर्बानी की जा सकती है. इसके लिए बकरों की खरीदारी शुरू हो चुकी है. कुछ लोग बकरीद के लिए बकरों की बुकिंग भी करा रहे हैं. ऐसे लोग बकरीद से दो-तीन दिन पहले अपने बुक कराए बकरे ले जाते हैं.
लेकिन कुर्बानी के लिए बकरे ऐसे ही आंख बंद कर नहीं खरीदे जाते हैं. कुर्बानी के लिए बकरे खरीदने के कुछ तय मानक हैं. बकरा हेल्दी हो, बीमार और विकलांग न हो. बकरा खरीदने वाला हर मुसलमान इसकी जांच-परख जरूर करता है. लेकिन इसके साथ ही एक और जांच करना बहुत जरूरी है. गोट एक्सपर्ट की मानें तो बकरा खरीदते वक्त उसकी आंखों की जांच करना भी बहुत जरूरी है.
प्रिंसिपल साइंटिस्ट और गोट एक्सपर्ट डॉ. आरएस पवैया का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि डॉक्टर के पास ले जाने पर ही बकरे की बीमारियों का पता चले. बकरे में होने वाले बदलावों को देखकर भी उसके बीमार होने का पता लगाया जा सकता है. जैसे भेड़-बकरी के अंदर जब हिमोकस नाम का पैरासाइड पलने लगता है तो बकरे की आंखों में बदलाव होने लगता है. क्योंकि हिमोकस बकरे का खून चूसता है. और जब यह खून चूसने लगता है तो इसकी संख्या भी बढ़ने लगती है. इसलिए गौर करने पर पता चलेगा कि हेल्दी बकरे की आंखें एकदम से चमकीली लाल-गुलाबी होती हैं.
जब बकरे-बकरियों के पेट में हिमोकस पनपने लगता है तो आंख हल्की गुलाबी हो जाती है. जैसे-जैसे हिमोकस की संख्या बढ़ती जाती है और वो खून चूसते हैं तो बकरे की आंख सफेद पड़ने लगती है. जिसका मतलब यह है कि बकरे में खून की कमी हो रही है. ये खतरनाक बीमारी जरूर है, लेकिन इसकी पहचान और इलाज संभव है वो भी बहुत ही आसान तरीके से.
खुद गांव में रहने वाला एक पशुपालक भी इसकी पहचान कर सकता है कि उसके भेड़-बकरी में हीमोकस परजीवी है या नहीं. हीमोकस एक खतरनाक परजीवी है. गोट एक्सपर्ट की मानें तो ये खासतौर से भेड़ और बकरी में पाया जाता है. अगर ये एक बार भेड़-बकरी के पेट में आ गया तो फिर उस पशु का हेल्दी होना मुश्किल है. फिर चाहें आप उस भेड़-बकरी को कितना ही हरा और सूखा चारा समेत दाना और मिनरल खिला लें.
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