Fodder Sorghum: पशुओं के लिए जानलेवा न हो जाए ज्वार का चारा, खिलाने से पहले जानें ये दो बातें

Fodder Sorghum: पशुओं के लिए जानलेवा न हो जाए ज्वार का चारा, खिलाने से पहले जानें ये दो बातें

Green Fodder Sorghum फोडर साइंटिस्ट का कहना है कि अगर ज्वार का चारा खिलाते वक्त खासतौर पर दो बातों का ख्याल रखा जाए तो इससे पशुओं को कोई नुकसान नहीं होगा. क्योंकि हरा चारा पशुओं के लिए जितना फायदेमंद होता है तो उतना ही नुकसानदायक भी है. लेकिन अगर हरा चारा खिलाते वक्त सावधानी बरती जाती है तो इसके फायदे ही फायदे हैं और नुकसान कुछ भी नहीं.

ज्वार की खेतीज्वार की खेती
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • May 15, 2026,
  • Updated May 15, 2026, 11:00 AM IST

पशुओं को कितना भी मिनरल मिक्चर खिला दिजिए या फिर अनाज (दाना) खि‍ला लें, लेकिन उसके बाद भी उसे हरे चारे की जरूरत होती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो हरा चारा पशुओं के लिए कई मायनों में बहुत फायदेमंद होता है. यहां तक की गर्मियों के मौसम में हरा चारा पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाता है. हरे चारे में नमी की मात्रा बहुत होती है. ये पीने के पानी की जरूरत को भी पूरा करता है. लेकिन हर एक हरे चारे को खि‍लाने का एक तरीका और वक्त होता है. अलग हरा चारा खिलाने में लापरवाही बरती गई तो जो चारा फायदा पहुंचाता है वो नुकसान भी दे सकता है. जैसे ज्वार के हरे चारे को लेकर पशुपालकों को खास सलाह दी जाती है. 

क्योंकि ज्वार का चारा खि‍लाने में होने वाली लापरवाही पशु की जान भी ले सकती है. यही वजह है कि सेंट्रल इंस्टी्ट्यूट ऑफ बफैलो रिसर्च सेंटर (सीआईआरबी), हिसार, हरियाणा ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि भैंस को कब और क्या खाने को देना चाहिए. भैंस की खुराक में हरा और सूखा चारा कितना हो. अगर दाना खिलाया जा रहा है तो उसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए. साथ ही दाने को हरे और सूखे चारे के साथ मिलाकर कैसे खिलाया जा सकता है.  

ये है ज्वार की चारा फसल काटने का वक्त 

फोडर साइंटिस्ट का कहना है कि ज्वार का चारा आमतौर पर मार्च-अप्रैल में बोया जाता है. और देखने में ये आता है कि किसान इसकी कटाई 50 दिन से पहले शुरु कर देते हैं, जो एकदम गलत है. कभी भी ज्वार का चारा 50 दिन से पहले नहीं काटना चाहिए. और दूसरी बात ये कि ज्वार के हरे चारे की सिंचाई करने में कंजूसी नहीं बरतनी चाहिए. चारे में नमी का बरकरार रहना बहुत जरूरी है. क्यों कि चारे में जैसे ही पानी की कमी होती तो उसमे एचसीएन (हाइड्रोजन साइनाइड) के तत्व पनपने लगेंगे.

जब एचसीएन का लेबल 20 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम चारे से अधिक हो जाता है जब ज्वार की हाइट 3 से 5 फ़ीट होती है तब ये ज्यादा हानिकारक हो जाता है. ऐसे में जब पशु इस चारे को खाता है तो इस उसके लीवर एंजाइम समाप्त हो जाते हैं. एचसीएन पशु के शरीर में जमा होने लगता है. इससे पशु की मौत तक हो जाती है. जानकारों का कहना है कि अब तो ज्वार की कुछ ऐसी भी वैराइटी आ रही हैं जिसमे एचसीएन की मात्रा बहुत ही कम होती है. 

हरे चारे में मिलाएं सूखा चारा 

डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे में नमी की मात्रा काफी होती है. पशु जब इस दौरान हरा चारा ज्यादा खाता है तो उसे डायरिया समेत और भी दूसरी बीमारी होने का खतरा बना रहता है. इतना ही नहीं उस चारे में मौजूद नमी के चलते ही दूध की क्वालिटी पर भी असर आ जाता है. इसलिए ये बेहद जरूरी है कि जब हमारा पशु हरा चारा खा रहा हो या बाहर चरने के लिए जा रहा हो तो पहले उसे सूखा चारा और थोड़ा बहुत मिनरल्स जरूर दें. सूखा चारा खूब खिलाने से हरे चारे में मौजूद नमी का स्तर सामान्य हो जाता है. वहीं मिनरल्स देने से दूध में फैट और दूसरी चीजों का स्तर भी बढ़ जाता है और दूध की क्वा‍लिटी खराब नहीं होती है.

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