
12 अंकों वाले एक खास नंबर की आजकल गांव से लेकर ग्लोबल तक खूब चर्चा हो रही है. इसे सिर्फ एक नंबर नहीं पशुओं की कुंडली भी कहा जा रहा है. शायद इसी लिए माना जा रहा है कि पशुओं की पहचान से जुड़ा ये खास नंबर देश में डेयरी और पशुपालन के लिए तरक्की की राह खोल रहा है. सरकार ने पशुओं की इस पहचान को नेशनल डिजिटल लाइव स्टॉक मिशन (NDLM) नाम दिया है. एक्सपर्ट का कहना है कि डेयरी और पशुपालन से जुड़ी जो योजनाएं अभी चल रही हैं और आगे चलकर जिन पर काम होना है उन सब का आधार एनडीएलएम ही है. बहुत जल्द पशुपालन से जुड़े दो बड़े सेक्टर डेयरी और मीट में ट्रेसेबिलिटी की डिमांड अनिवार्य हो जाएगी. एक्सपोर्ट सेक्टर मजबूत होगा, क्योंकि ट्रेसेबिलिटी सिस्टम से भारतीय पशु उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करेंगे.
ऐसे में एनडीएलएम ही मददगार साबित होगा. ‘ट्रेस टू ट्रेड’ भी इसी से मुमकिन होगा. अगर इसके काम करने के तरीके की बात करें तो पशुओं के टीकाकरण, प्रजनन और उत्पादकता से लेकर बाजार तक का पूरा डिजिटल ट्रैक रिकॉर्ड किया जाता है. पशुओं के डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर बीमा, लोन और मुआवजा आसानी से मिल जाता है. इतना ही नहीं एक्सपोर्ट सेक्टर मजबूत होता है क्योंकि ट्रेसेबिलिटी सिस्टम से भारतीय पशु उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा कर रहे हैं. पशुओं का डाटा रखना कितना जरूरी है इसका महत्व एनडीएलएम से चल जाता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि NDLM के तहत पशुओं का तैयार होने वाला पशु आधार स्वास्थ्य रिकॉर्ड, टीकाकरण इतिहास, प्रजनन डिटेल और प्रोडक्शन मेट्रिक्स को साथ जोड़ती है. भारत में आज पशुओं की आबादी 53 करोड़ से ज़्यादा है. इसमे भी सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वालीं गाय और भैंस की आबादी 30 करोड़ है. NDLM एक ऐसे सेक्टर में अभूतपूर्व पारदर्शिता ला रहा है जो कृषि GDP में 30 फीसद से ज़्यादा का योगदान देता है. पशुधन सेक्टर कृषि क्षेत्र की तुलना में तेज़ी से बढ़ रहा है.
NDLM के तहत सिर्फ गाय-भैंस ही नहीं, बल्कि भेड़ और बकरियों समेत लाखों छोटे जुगाली करने वाले जानवरों को रजिस्टर करके डिजिटल पहचान बनाने की एक बड़ी कोशिश है.
NDLM बीमारी का पता लगाने की क्षमता को सक्षम करके बीमारी से होने वाले नुकसान को कम करता है. जिलास्तर पर देश के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों को डिजिटल रूप में ट्रैक किया जाता है. वहीं हर एक पशु को बीमा और क्रेडिट से जोड़कर बाजार आधारित पशुधन अर्थव्यवस्था स्थापित की जाती है. ये सिस्टम गाय के घी, पश्मीना ऊन और अन्य प्रीमियम और स्वदेशी एनिमल प्रोडक्ट जैसे स्वदेशी उत्पादों में वैश्विक विश्वास बना रहा है.
एक्सपर्ट के मुताबिक NDLM पशुओं की चार प्रमुख बीमारियों के लिए निगरानी को मानकीकृत बनाता है. खुरपका-मुंहपका रोग, ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (PPR), और क्लासिकल स्वाइन फीवर, और ग्रामीण डेटा को ग्रामीण आय में बदलता है. एक ऐसे देश में जहाँ पशुधन मूल्य का तीन-चौथाई हिस्सा किसानों के पास वापस आता है.
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