
दुनिया नई-नई तकनीक अपना रही है और अब डेयरी सेक्टर में भी बड़ा बदलाव आ रहा है. इसी बीच, अमूल ने ‘सरलाबेन’ नाम का एक नए डिजिटल क्रांति का आगाज़ किया है. यह एक ऐसा स्मार्ट तकनीक है, जो किसानों और पशुपालकों की मदद के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगा. अब गुजरात के गांवों में पशुपालकों को मदद के लिए न तो हर बार किसी पड़ोसी को बुलाना पड़ेगा और न ही तुरंत डॉक्टर ढूंढना पड़ेगा. दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 'अमूल एआई' का लोकार्पण किया है, जिसे पशुपालकों के लिए एक आधुनिक सहायक के रूप में देखा जा रहा है.
'अमूल एआई' को इस तरह तैयार किया गया है कि पशुपालक अपनी गाय-भैंस के स्वास्थ्य, आहार और टीकाकरण जैसी जरूरी जानकारी मोबाइल पर ही प्राप्त कर सकें. इस योजना के केंद्र में एआई सहायक का इस्तेमाल करना आसान है, जो आसान भाषा में पशुपालकों को मार्गदर्शन देने के लिए बनाई गई है. इसका मकसद तकनीक को आसान बनाना है, ताकि छोटे किसान भी बिना झिझक इसका लाभ उठा सकें.
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह तकनीक खास तौर पर छोटे किसानों और पशुपालक महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद करेगी. डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बजट में डेयरी इको-सिस्टम को मजबूत करने के लिए 20 हज़ार वेटरनरी प्रोफेशनल्स तैयार करने का प्रावधान किया गया है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में भारतीय पशुपालकों के हितों की 'चट्टान' की तरह रक्षा की गई है, ताकि देश की डेयरी दुनिया की नंबर-1 डेयरी बनी रहे.
अमूल की ये पहल साबित करती है कि जब सरकार, सहकार और टेक्नोलॉजी एक साथ मिलते हैं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि एआई आधारित यह सहायता पशुपालकों के काम को कितना आसान बनाती है और उत्पादन व प्रबंधन में किस तरह सुधार लाती है और AI की मदद से खेती किसानी किस स्तर पर पहुंचता है. (हेताली एम शाह की रिपोर्ट)