
बरसात में पशु बीमार भी होते हैं और संक्रमण की चपेट में भी आते हैं. ये पशुओं के लिए तो खतरनाक होता ही है, साथ में उस पशु का दूध पीने वालों के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है. खासतौर पर बरसात के दौरान जब पशुओं थन संबंधी बीमारी होती है तो ऐसे में डॉक्टर उस पशु का दूध पीने को मना करते हैं. क्योंकि ऐसे वक्त में गाय-भैंस का दूध पीना खतरे से खाली नहीं होता है. लेकिन पशुपालक कुछ लीटर दूध के लालच में बीमारी से संक्रमित दूध को बेच देते हैं. लेकिन इससे बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि जब आप दूध लेने जाएं तो अलर्ट हो जाएं.
पशुपालक गाय-भैंस का दूध निकाल रहा हो तो पशु के थन पर निगाह जरूर डाल लें, अगर थनों पर सूजन या जख्म जैसा कुछ नजर आए तो उस पशु के दूध को ना खरीदें. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह डेयरी मैनेजमेंट है. जब मैनेजमेंट के दौरान कुछ चीजों की अनदेखी की जाती है तो दूध देने वाला पशु थनों की बीमारी से संक्रमित हो जाता है. इसलिए पशु का दूध दुहाने से पहले और बाद में कुछ काम की बातों पर अमल जरूर करना चाहिए.
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