Milk Issue: बरसात में दूध पीने वाले हो जाएं अलर्ट, छोटी सी अनदेखी से हो सकती है बड़ी बीमारी 

Milk Issue: बरसात में दूध पीने वाले हो जाएं अलर्ट, छोटी सी अनदेखी से हो सकती है बड़ी बीमारी 

Milk Issue जिस पशु को थनों का संक्रमण हो और उसके थनों में दवा लगी हो तो ऐसे पशुओं का दूध 72 घंटे तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसे दूध को पीने से मनुष्य में तपेदिक, गले में खराश जैसी बीमारियां हो सकती है. डेयरी में होने वाले नुकसान के लिए सबसे बड़ी वजह थनैला रोग को माना गया है.

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Aug 21, 2026,
  • Updated Aug 21, 2026, 6:32 PM IST

बरसात में पशु बीमार भी होते हैं और संक्रमण की चपेट में भी आते हैं. ये पशुओं के लिए तो खतरनाक होता ही है, साथ में उस पशु का दूध पीने वालों के लिए ज्यादा नुकसानदायक होता है. खासतौर पर बरसात के दौरान जब पशुओं थन संबंधी बीमारी होती है तो ऐसे में डॉक्टर उस पशु का दूध पीने को मना करते हैं. क्योंकि ऐसे वक्त में गाय-भैंस का दूध पीना खतरे से खाली नहीं होता है. लेकिन पशुपालक कुछ लीटर दूध के लालच में बीमारी से संक्रमित दूध को बेच देते हैं. लेकिन इससे बचने का सबसे आसान तरीका यही है कि जब आप दूध लेने जाएं तो अलर्ट हो जाएं. 

पशुपालक गाय-भैंस का दूध निकाल रहा हो तो पशु के थन पर निगाह जरूर डाल लें, अगर थनों पर सूजन या जख्म जैसा कुछ नजर आए तो उस पशु के दूध को ना खरीदें. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह डेयरी मैनेजमेंट है. जब मैनेजमेंट के दौरान कुछ चीजों की अनदेखी की जाती है तो दूध देने वाला पशु थनों की बीमारी से संक्रमित हो जाता है. इसलिए पशु का दूध दुहाने से पहले और बाद में कुछ काम की बातों पर अमल जरूर करना चाहिए. 

थनों के संक्रमण की वजह

  • थनों और निप्पलों पर चोट का लगाना.
  • पशु के अंदरूनी संक्रमण से. 
  • पशु शेड में गंदगी के चलते. 
  • गलत तरीके से या आधा ही दूध निकालना. 
  • लटकते हुए थन और लंबे बेलनाकार निपल.
  • गंदी मिल्किंग मशीन का इस्तेमाल करने से.
  • पशु शेड में मच्छर, मक्खी , गोबर और धूल-मिट्टी के चलते. 
  • पशुओं को बुखार आने के चलते. 

पशुओं में थनैला संक्रमण के लक्षण

  • दूध का पीला, भूरा या लाल होना.
  • थन का गर्म होना और दर्दनाक सूजन.
  • पीडि़त पशु के दूध में थक्को का दिखाई देना.
  • थनैला पीडि़त पशु का दूध गर्म करने पर फट जाता है.
  • पशुओं को थनैला बीमारी से कैसे बचाएं-
  • दूध दहने से पहले धानों की अच्छे से सफाई करे.
  • दूध निकालने के बाद बछड़े को दूध पीने दें. 
  • मिल्किंग मशीन को पूरी तरह से साफ रखें.
  • पीडि़त पशुओं को अलग करके इलाज करना चाहिए.
  • दूध निकालने से पहले साबुन से हाथो को अच्छी तरह से धोना चाहिए.
  • दूध दुहने के बाद एंटीसेप्टिक जैसे लाल दवा में निपलो को डुबना चाहिए.
  • पशुओं के शेड के फर्श को हमेशा साफ रखना चाहिए.
  • शेड में आने वाली मक्खियों को नियंत्रित करने के उपाय करना चाहिए.

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