
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में दूध उत्पादकों के लिए बड़ी घोषणा की. राज्य सरकार ने सरकारी डेयरी ब्रांड आविन (Aavin) के लिए दूध की खरीद कीमत 38 रुपये से बढ़ाकर 41 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने यह घोषणा विधानसभा में नियम 110 के तहत की. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बताया कि प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों के जरिए Aavin को मिलने वाले दूध की खरीद कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जाएगी. इससे राज्य के 3.16 लाख से अधिक दूध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा.
नई व्यवस्था में सहकारी समिति के स्तर पर 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होगी, जबकि सरकार की ओर से मिलने वाला प्रोत्साहन 2 रुपये बढ़ेगा. इस तरह कुल मिलाकर दूध उत्पादकों को पहले के मुकाबले 3 रुपये प्रति लीटर ज्यादा मिलेंगे. सरकार ने कहा है कि यह फैसला दूध उत्पादन की बढ़ती लागत और किसानों की मेहनत को ध्यान में रखकर लिया गया है.
सीएम विजय ने कहा कि तमिलनाडु में करीब 3.16 लाख दूध उत्पादक 8,800 दुग्ध सहकारी समितियों को दूध की सप्लाई करते हैं. राज्य सरकार रोजाना करीब 34 लाख लीटर दूध खरीदती है, जिसमें से लगभग 31 लाख लीटर दूध उपभोक्ताओं को बेचा जाता है.
Aavin के लिए दूध की खरीद कीमत 1 नवंबर 2022 से 38 रुपये प्रति लीटर निर्धारित थी. इसमें 35 रुपये प्रति लीटर मूल कीमत और 3 रुपये प्रति लीटर राज्य सरकार का प्रोत्साहन शामिल था. सरकार के मुताबिक, इस अवधि में पशु आहार और मजदूरी की लागत बढ़ी है, जिससे दूध उत्पादकों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है.
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि दूध खरीद कीमत बढ़ाने के फैसले से राज्य सरकार पर हर महीने करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा. यानी सालाना अतिरिक्त खर्च लगभग 360 करोड़ रुपये होगा. उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय चुनौतियों के बावजूद दूध उत्पादकों की आजीविका और उन्हें उचित मेहनताना दिलाने को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.
वहीं, तमिलनाडु सरकार ने महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHG), ग्रामीण आजीविका और युवाओं के रोजगार को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाओं की घोषणा की है. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के तहत गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण लोन से जुड़े कार्यक्रमों में कुल 15 प्रमुख घोषणाएं की गई हैं.
‘वेट्री पेंगल SHG अवॉर्ड’ के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगातार पांच साल से काम कर रहे 1,000 बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्वयं सहायता समूहों को ₹1 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा. इस योजना पर सरकार ₹10.30 करोड़ खर्च करेगी. इसका उद्देश्य SHG में वित्तीय अनुशासन और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है.
महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बिचौलियों के बिना सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए एक समर्पित ई-कॉमर्स पोर्टल बनाया जाएगा. तमिलनाडु कॉरपोरेशन फॉर डेवलपमेंट ऑफ वुमेन के जरिए तैयार होने वाले इस पोर्टल पर पांच साल में 5,000 SHG को जोड़ा जाएगा. इसके लिए ₹2 करोड़ का प्रावधान किया गया है.
राज्य सरकार के विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को SHG और SHG आधारित उद्यमों से तैयार उत्पादों और सेवाओं की खरीद में प्राथमिकता देने का भी फैसला किया गया है. इससे स्वयं सहायता समूहों के लिए बाजार और आय के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
किशोरियों के बीच मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए 10,000 स्कूलों और 1,000 कॉलेजों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इस पहल के लिए ₹60 लाख का बजट रखा गया है. (पीटीआई)