
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मछली पालन करने वाले किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. उन्होंने एक्वा फीड यानी मछलियों के चारे की कीमतों को कम करने के लिए चारा बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री की पहल के बाद फीड कंपनियों ने किसानों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए चारे की कीमत में 4 रुपये प्रति किलो की कटौती करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही मछली पालकों और चारा कंपनियों दोनों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. यानी अब एक्वा फीड की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) 112 रुपये प्रति किलो से घटकर 108 रुपये प्रति किलो हो जाएगी.
मुख्यमंत्री नायडू ने सिर्फ कीमत कम करने तक सीमित नहीं रहते हुए एक लंबी अवधि की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए मछली पालकों, चारा कंपनियों और सरकारी अधिकारियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी. इस समिति को 20 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है. समिति चारे की कीमतों के साथ-साथ मछली पालन से जुड़ी अन्य समस्याओं, प्रोसेसिंग व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर भी सुझाव देगी.
बैठक में मछली पालकों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मछली पालन में इस्तेमाल होने वाली लगभग सभी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि मछली और झींगा उत्पादों के दाम उस तेजी से नहीं बढ़े हैं. इससे किसानों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है. किसानों ने सरकार से पानी की पर्याप्त उपलब्धता, बीमा सुविधा बढ़ाने और सब्सिडी योजनाओं को आसान बनाने की मांग भी रखी. उन्होंने झींगा तालाबों के लिए व्यापक बीमा कवरेज और नर्सरी तालाबों को बढ़ावा देने की अपील की.
CM नायडू ने कहा कि मछली पालन क्षेत्र लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है और इसकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने एक्वा सेक्टर को बिजली सब्सिडी के रूप में 1,543 करोड़ रुपये की सहायता दी है.
उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक्वाकल्चर गतिविधियों के लिए पानी की आपूर्ति में कमी नहीं आने दी जाएगी और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान तैयार किया जाएगा.
वहीं, चारा बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि सोयाबीन और फिश मील जैसे कच्चे माल की कीमत बढ़ने और उपलब्धता में कमी के कारण उत्पादन लागत बढ़ी है. कंपनियों का कहना है कि महंगे कच्चे माल की वजह से चारे की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने सरकार को बताया कि सस्ते सोयाबीन आयात की सुविधा नहीं होने के कारण घरेलू बाजार से महंगे दामों पर खरीद करनी पड़ रही है.
मुख्यमंत्री ने मछली पालक किसानों से उत्पादन की क्वालिटी और निर्यात मानकों का ध्यान रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बने रहने के लिए क्वालिटी नियंत्रण बेहद जरूरी है. उन्होंने हाल में कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात में गुणवत्ता संबंधी आपत्तियों का उदाहरण देते हुए कहा कि मछली और झींगा उत्पादन में भी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए. सरकार और किसानों के बीच हुई इस बैठक के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि चारे की कीमतों में कमी से आंध्र प्रदेश के हजारों मछली पालकों को राहत मिलेगी और एक्वाकल्चर क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. (PTI)