
गर्मी का एहसास तो मार्च का महीना ही कराने लगता है. लेकिन अप्रैल आते-आते तापमान और चढ़ जाता है. इस दौरान तो गर्म हवाएं भी चलने लगती हैं. इंसानों के साथ ही ये पशुओं को भी नुकसान पहुंचाती हैं. ऐसे में पशुओं को यात्रा कराना बहुत ही जोखिम भरा हो जाता है. लेकिन जिन्हें हर हाल में नया पशु खरीदना ही है तो उनके लिए मजबूरी हो जाती है. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कुछ खास बातों का ख्याल रखते हुए नए पशुओं की खरीदारी की जा सकती है.
खासतौर से ऐसे पशुपालक जो गांव-हाट से बकरे-बकरियां खरीदकर ला रहे हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि गर्मियों में सफर करके आए बकरे-बकरियों को क्या खिलाया जाए, पीने को कैसा और कब-कब पानी दिया जाए. खुले में चराई के लिए कब ले जाएं आदि. यहां तक की बाड़े या शेड में जहां बकरे-बकरियां रखे गए हैं वहां उनका रखरखाव कैसे किया जाए.
गोट एक्सपर्ट का कहना है कि बकरों को बाजार में लाने से पहले कारोबारी उन्हें खूब खिला पिलाकर लाते हैं. बहुत सारे कारोबारी बकरे को तगड़ा दिखाने के चक्करर में बेसन का घोल समेत कुछ खास तरह के केमिकल पिलाकर लाते हैं. बेसन पेट को फुला देता है. लेकिन गर्मियों में बेसन पीने से बकरे का पेट भी खराब हो जाता है. अब जैसे ही बकरा घर आता है तो घर के बच्चे खुशी खुशी में उसे खूब खिलाने पिलाने लगते है. इस तरह ओवर डाइट के चक्कर में बकरा बीमार पड़ जाता है. कई बार तो बकरे की मौत तक हो जाती है.
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