Goat Milk-Meat: दूध-मीट के लिए बकरी पालन करना चाहते हैं तो ये नस्ल कराएगी मुनाफा 

Goat Milk-Meat: दूध-मीट के लिए बकरी पालन करना चाहते हैं तो ये नस्ल कराएगी मुनाफा 

Goat Milk-Meat राजस्थान जिले का एक नाम सिरोही है. इसी जिले के नाम पर बकरे-बकरियों की एक खास नस्ल‍ सिरोही नाम से जानी जाती है. छोटे किसानों के बकरी पालन के लिए इस नस्ल को बहुत अच्छी माना जाता है. क्योंकि देशभर में इसे कहीं भी पाल सकते हैं. इसकी पहचान दूध और मीट दोनों के लिए है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 16, 2026,
  • Updated Mar 16, 2026, 2:51 PM IST

मीट के लिए अब एक खास साइज के बकरों की डिमांड होने लगी है. बकरा ऐसा हो जो बहुत ज्यादा मोटा ताजी और फैटी न हो. रोस्टेड के लिए ऐसे बकरों की बहुत डिमांड आ रही है. यही वजह है कि अब बकरी पालन दूध और मीट दोनों के लिए हो रहा है. बकरी दूध और बच्चे दोनों देती है. बच्चों में जो बकरा होता है, तो उसे बड़ा कर बाजार में बेच दिया जाता है. इस बारे में गोट एक्सपर्ट का कहना है कि अलग-अलग राज्यों के हिसाब से ऐसे बकरों की तीन-चार नस्ल हैं. लेकिन परेशानी ये है कि इसमे ज्यादातर वो नस्ल हैं जो अपने ही राज्य या एक खास क्षेत्र में ही पनपती हैं. 

लेकिन राजस्थान की सिरोही नस्ल के बकरे ऐसे हैं जिन्हें ठंडे इलाकों को छोड़कर कहीं भी पाला जा सकता है. देशभर में इस खास नस्ल के बकरे-बकरियों को दूध और मीट के लिए बहुत पसंद किया जाता है. सिरोही नस्ल की बकरी एक दिन में 750 ग्राम से लेकर एक लीटर तक दूध देती है. वहीं इस नस्ल के बकरों का वजन 50 से 60 किलो तक हो जाता है.

दो बार दो बच्चों को जन्म देती है सिरोही

सिरोही नस्ल की बकरी राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी पायी जाती है. वैसे इसका पालन अब भारत के अन्य हिस्सों में भी किया जाता है. इसकी पहचान की बात की जाए तो यह छोटे आकार का जानवर है. इसके शरीर का रंग भूरा होता है. वहीं शरीर पर हल्के या भूरे रंग के धब्बे भी देखने को मिलते हैं. कान इसके चपटे और लटके हुए होते हैं, जबकि सींग मुड़े हुए. बाल छोटे और मोटे होते हैं. वहीं नर सिरोही के शरीर की लंबाई लगभग 80 सेमी तक होती है. जबकि मादा की लंबाई लगभग 62 सेमी तक होता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि इसकी 60 प्रतिशत से ज्यादा संभावना होती है कि ये दो बच्चों को जन्म दे.

सिरोही पालने पर चारे की नहीं होती परेशानी

गोट एक्सपर्ट कहते हैं कि ये नस्ल बहुत ही जिज्ञासु प्रकृति की होती है. इसके खाने की बात की जाए तो ये विभिन्न प्रकार का चारा, जो कड़वा, मीठा, नमकीन और स्वाद में खट्टा हो तो भी सभी को खा लेती है. वैसे स्वाद और आनंद के साथ फलीदार भोजन जैसे लोबिया, बरसीम, लहसुन आदि खाना इन्हें ज्यादा पसंद होता है. मुख्य रूप से ये चारा खाना ज्यादा पसंद करती हैं. इससे सिरोही बकरियों को ऊर्जा और हाई प्रोटीन मिलता है. एक खराब आदत भी इस नस्ल की होती है कि ये भोजन वाले स्थान पर पेशाब कर देती हैं, जिससे भोजन खराब हो जाता है. इससे बचने के लिए सिरोही के बाड़े में खास तरह के फीड स्टाील बनाने चाहिए. 

ऐसे दूर कर सकते हैं सिरोही की बीमारियां 

एक्सपर्ट के मुताबिक सिरोही बकरियों की अच्छी सेहत के लिए कुछ खास टिप्स पर ध्यान देना चाहिए. सिरोही बकरी के ब्याने के फौरन बाद ही दूध नहीं निकालना चाहिए. वहीं ब्यांत वाली बकरियों को ब्याने से 15 दिन पहले साफ, खुले और कीटाणु रहित ब्याने वाले कमरे में रखने का खास इंतजाम करना चाहिए. जन्म के तुरंत बाद मेमने के पूरे शरीर को साफ सुथरे और सूखे कपड़े से साफ करना चाहिए. वहीं उसके नाक, मुंह, कान में से जाले साफ करना चाहिए. इन बकरियों का क्लोस्ट्रीडायल बीमारी से बचाव करना बहुत जरूरी होता है. इसके लिए वैक्सीन जरूर लगवाना चाहिए. जब बच्चा पांच से छह सप्ताह का हो जाए  तब रोग से लड़ने के लिए टीकाकरण कराएं.

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