Goat-Sheep overeating: फसल कटाई के दौरान ज्यादा न खाने दें भेड़-बकरियों को, नहीं तो होगी जानलेवा बीमारी

Goat-Sheep overeating: फसल कटाई के दौरान ज्यादा न खाने दें भेड़-बकरियों को, नहीं तो होगी जानलेवा बीमारी

Goat-Sheep overeating एंटरोटॉक्सिमिया कीड़ा इतना खतरनाक होता है कि कुछ ही दिन में भेड़-बकरियों की जान ले लेता है. इसी कीड़े की वजह से हर साल बड़ी संख्या में भेड़ों की मौत हो जाती हैं. दो साल पहले ही करीब 300 भेड़ों की मौत ज्यादा खाने से हो गई थी. यह मामला राजस्थान के जैसलमेर का था. इस तरह के मामले तब ज्यादा सामने आते हैं जब भेड़ों को खुले मैदान में चरने के लिए चारा ज्यादा मिलता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 16, 2026,
  • Updated Mar 16, 2026, 10:22 AM IST

मार्च का आधा महीना बीत चुका है 15 दिन बाद अप्रैल शुरू हो जाएगा. अप्रैल में ही गेहूं की कटाई भी शुरू हो जाएगी. बेशक अब गेहूं की कटाई के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें आ गई हैं, बावजूद इसके आज भी बहुत सारी जगहों पर हाथ से गेहूं की कटाई होती है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि गेहूं की कटाई हाथ से हो या मशीन से, लेकिन कटाई के दौरान गेहूं के दाने खेत में रह ही जाते हैं. हालांकि इसका बड़ा फायदा पशुपालकों को मिलता है. फसल की कटाई के बा पशुपालक खाली खेतों में अपने पशुओं को छोड़ देते हैं. पशु भी खासतौर से भेड़-बकरियां सुबह से शाम तक खेतों में ही चरते रहते हैं. 

लेकिन एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक गेहूं कटाई के बाद खाली खेतों में भेड़-बकरियों का सुबह से शाम तक चरना जितना फायदेमंद है उससे कहीं ज्यादा नुकसान दायक या कह लें कि जानलेवा साबित होता है. क्योंकि बकरियों से ज्यादा भेड़ों को होने वाली एंटरोटॉक्सिमिया बीमारी इसी ओवर ईटिंग के चलते होती हैं. मानसून में हरा चारा और खेतों में फसल की कटाई होने के बाद वहां रह जाने वाले फसल के अवशेष मिलने पर भेड़ें ज्यादा खाने लगती हैं. सैंकड़ों भेड़ें एक साथ चर रही होती हैं तो एक-एक भेड़ पर नजर रखना भी मुमकिन नहीं होता है.  

एक साथ सैकड़ों भेड़ों की ऐसे जान लेता है

शीप एक्सपर्ट सुमेर सिंह का कहना है कि जब एंटरोटॉक्सिमिया नाम का बैक्टीएरिया भेड़ों में पनपता है तो पहले भेड़ों को दस्त होते हैं. फिर एक दम से दस्त बंद हो जाते हैं. लेकिन दो ही दिन बाद अचानक से भेड़ में जरूरत से ज्यादा कमजोरी आ जाती है. वो ठीक से चल भी नहीं पाती है. चलने की कोशिश करती है तो लड़खड़ा कर गिर जाती है. फिर से उसे दोबारा एक-दो दस्त आते हैं.

लेकिन इस बार दस्त के साथ थोड़ा सा खून भी आने लगता है. इसके बाद उस भेड़ की मौत हो जाती है. और यह सब होता है भेड़ों की आंत में अचानक से पनप उठे इसी बैक्टीरिया के चलते. इस बीमारी का इलाज सिर्फ टीका है. लेकिन हेल्दी भेड़ को ही टीका लगाया जा सकता है. जो भेड़ें बीमार हो जाती हैं. इस बैक्टीतरिया की चपेट में आ जाती हैं तो उन्हें  वैक्सी न देकर ठीक करना मुमकिन नहीं है. 

भेड़ों को चराने से पहले अपनाएं ये उपाय

जब भेड़ों के झुंड बाहर खुले में चरने के लिए जा रहे हों तो बेहद जरूरी है कि हम पहले उसे सूखा चारा और मिनरल्स जरूर दें. सूखा चारा खूब खिलाने से हरे चारे में मौजूद नमी का स्तर सामान्य हो जाता है. एनीमल एक्सपर्ट की मानें तो पशु को सूखे चारे के तौर पर कई तरह का भूसा दिया जा सकता. वहीं मिनरल्स में खल, बिनौले, चने की चूनी आदि दी जा सकती है. 

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