
दूध उत्पादन में देश नंबर वन है. गाय-भैंस और बकरी सभी का मिलाकर दूध उत्पादन 24 करोड़ टन से ज्यादा हो चुका है. लेकिन सवाल ये है कि इसके बाद भी डेयरी और पशुपालन सेक्टर नंबर वन जैसी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं. डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी नाम मात्र का ही है. वहीं पशुपालक भी परेशान हैं कि उन्हें अच्छा मुनाफा नहीं मिल रहा है. जिसके चलते उनकी अगली पीढ़ी पशुपालन को अपनाना नहीं चाहती है. इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए बीते कुछ वक्त पहले ही “फ्यूचर रोडमैप ऑफ इंडियन डेयरी सेक्टर” नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.
जहां डेयरी और पशुपालन की सबसे बड़ी परेशानी हरे चारे पर भी चर्चा हुई थी. 15 ऐसे टिप्स दिए गए जिससे पशुपालन के मुनाफे को बढ़ाया जा सकता है. इस दौरान एक्सपर्ट ने बताया था कि देश में तीनों तरह हरे-सूखे और मिनरल्स चारे की कमी 25 फीसद से भी ऊपर निकल गई है. यही वजह है कि दूध और उससे बने प्रोडक्ट महंगे होते जा रहे हैं. महंगे प्रोडक्ट की वजह से देश के डेयरी प्रोडक्ट, एक्सपर्ट मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पा रहे हैं.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि डेयरी में पशुओं के पोषण को वरीयता दी जानी चाहिए. उत्पादकता बढ़ाने पर काम होना चाहिए. चारे की कमी या फिर इमरजेंसी के हालात में लगातार चारे की सप्लाई बनी रहे इसके लिए क्षेत्रीय चारा बैंक और स्टोरेज गोदाम स्थापित करने चाहिए. क्वालिटी के चारे और बीजों की सप्लाई में सुधार के लिए राज्यवार योजनाएं बननी चाहिए. इंपोर्ट को कम करते हुए बरसीम जैसे फलीदार बीजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दें. नॉन फारेस्ट बंजर जमीन, चरागाह भूमि और सामुदायिक भूमि का इस्तेमाल हरे चारे की खेती के लिए करना चाहिए.
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