Goat Farming : बकरियों को खूंटे पर नहीं खुले में चराना है फायदेमंद, जानें बड़ी वजह

Goat Farming : बकरियों को खूंटे पर नहीं खुले में चराना है फायदेमंद, जानें बड़ी वजह

यह बात सही है कि आज जगह की कमी के चलते हम लोग नापतौल से ही बकरियों के लिए बाड़े बनाते हैं. बकरी किस जगह रखी जाएंगी. बकरी के बच्‍चे और बकरे दूसरी जगहों पर रखे जाएंगे. एक हिस्से में बकरियों का चारा रहेगा.

घास के मैदान में चरने के लिए निकलीं बरबरी बकरियां. घास के मैदान में चरने के लिए निकलीं बरबरी बकरियां.
नासि‍र हुसैन
  • Noida,
  • Dec 09, 2022,
  • Updated Dec 09, 2022, 2:09 PM IST

किसी भी पक्षी को आप पिंजरे में बंद रखे, लेकिन उसे खाने के लिए बढ़ियां-बढ़ियां दाना-पानी दें फिर भी उसका मन पूरी तरह से पिंजरे में नहीं लगेगा. इसी तरह दूध देने वाली बकरी हो या मीट के लिए पाले जा रहे बकरे, सभी के लिए खुले में घूमना-फिरना और चरना बेहद जरूरी है. किसी भी कमरे या हॉल में घूमने वाली बकरी को भी दिन में एक बार जगह का बदलाव चाहिए होता है. फिर चाहें जगह की कमी के चलते आप बकरी को एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जाकर ही क्‍यों न छोड़ दें.  

मथुरा में बकरी पालन करने वाले स्‍टार साइंटीफिक गोट फार्मिंग के संचालक राशिद अल हक बताते हैं, यह बात सही है कि आज जगह की कमी के चलते हम लोग नापतौल से ही बकरियों के लिए बाड़े बनाते हैं. बकरी किस जगह रखी जाएंगी. बकरी के बच्‍चे और बकरे दूसरी जगहों पर रखे जाएंगे यह सब प्‍लान किया जाता है. बेशक हम इस तरह के बाड़ों में बकरे-बकरियों को रस्सी से बांधते नहीं हैं, लेकिन एक हॉल और कमरे की सीमा में रखते हैं. वहीं पर उन्‍हें खाने के लिए दिया जाता है और वहीं पानी पिलाया जाता है.

खुले में अपनी पसंद की खुराक तलाशती हैं बकर‍ियां

गोट फार्मर राशिद अल हक का कहना है, जब हम बकरी को फसल कटे किसी खेत में, खुले मैदान में या जंगल के आसपास खुला छोड़ते हैं तो ऐसे में बकरियां अपनी मर्जी से चरती हैं. जहां भी जो भी उन्‍हें अपने खाने लायक दिखता है तो उसे खाते हैं. ऐसी चीजों में ज्‍यादातर वो होती हैं जो उन्‍हें बाड़े में खाने को नहीं मिलती हैं या फिर जिसकी जरूरत उनके शरीर को होती है.

दिमागी और शारीरिक जरूरत भी है खुले में चरना

राशिद अल हक का कहना है कि खुले मैदान, खेत और जंगल के सहारे चरना बकरे-बकरियों की दिमागी और शारीरिक जरूरत भी है. एक ही जगह पर घंटों बंधे रहने या घूमने के बाद उन्‍हें बदलाव चाहिए होता है. ऐसा होने से बकरे-बकरी बहुत खुश होते हैं और कभी-कभी तो खुले में कुछ खाने के बजाए उछल कूद करते हुए यहां-वहां दौड़ लगाते हैं. ऐसा होने पर बकरी जहां दूध ज्‍यादा देने लगती है वहीं बकरे का वजन तेजी से बढ़ता है.  

  

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