
भारत के डेयरी क्षेत्र में तकनीक के जरिए एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है. दरअसल, बीएल एग्रो की सहयोगी कंपनी लीड्स जेनेटिक्स ने घोषणा की है कि उसने देश में पहली बार बड़े स्तर पर गिर गायों के भ्रूण स्थानांतरण (एम्ब्रियो ट्रांसफर) कार्यक्रम को सफलतापूर्वक शुरू किया है. यह कार्यक्रम हाल ही में बने एक आधुनिक पशु प्रजनन और डेयरी तकनीक केंद्र में किया गया. इस केंद्र में आईवीएफ, पैथोलॉजी और जीनोमिक्स जैसी नई और उन्नत तकनीकों की सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे बेहतर नस्ल की गायों को तैयार करने में मदद मिलेगी.
बता दें कि, दिसंबर 2025 में इस कार्यक्रम का पहला चरण शुरू हुआ था. इसमें लीड्स जेनेटिक्स ने 116 गायों पर IVF तकनीक का इस्तेमाल किया और करीब 70 फीसदी सफलता हासिल की. यह भारत के पशुपालन क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि पहले इस स्तर पर ऐसा काम नहीं हुआ था. पहले चरण की सफलता के बाद, दूसरे चरण में 160 गायों (गिर, साहीवाल और HF क्रॉस नस्ल) में भी भ्रूण स्थानांतरण सफलतापूर्वक किया गया. खास बात यह है कि गिर नस्ल की गाय ज्यादा दूध देने, मौसम के अनुकूल रहने और बीमारियों से लड़ने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं, इसलिए इस तकनीक में इनकी अहम भूमिका है.
बीएल एग्रो के प्रबंध निदेशक अशिष खंडेलवाल ने कहा कि यह सफलता भारत के डेयरी सेक्टर के लिए बहुत बड़ा मोड़ साबित हो सकती है. उनका कहना है कि IVF और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी नई तकनीकों से गायों की नस्ल बेहतर होगी और दूध उत्पादन भी बढ़ेगा.
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अच्छी नस्ल वाली गायों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा सकती है. इससे दूध उत्पादन 2-3 गुना तक बढ़ने की संभावना है, जिससे किसानों की आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा होगा. यह पूरा कार्यक्रम भारत और ब्राजील के सहयोग से चल रहा है. इसमें ब्राजील की एम्ब्रापा संस्था और अन्य विशेषज्ञ भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब एम्ब्रापा ने भारत की किसी निजी कंपनी के साथ मिलकर काम किया है. कुल मिलाकर यह पहल भारत में डेयरी और पशुपालन के क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है.