
मार्च महीने ने गर्मी का एहसास करा दिया है. तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इस बीच बारिश होने का भी अलर्ट है. हालांकि कुछ जगहों पर छिटपुट बारिश हो भी चुकी है. बावजूद इसके अगले ही पल ये नहीं पता होता कि मौसम कैसा होगा. तापमान में भी एकदम से बढ़ोतरी होने लगती है. हालांकि अभी एकदम से परेशान करने वाला मौसम नहीं है, लेकिन मौसम के जानकारों की मानें तो आने वाले 10 दिन बाद पारा एकदम से चढ़ने लगेगा. जिसका सीधा असर तालाब में पलने वाली मछलियों पर भी देखने को मिलेगा. क्योंकि पारा चढ़ते ही तालाब का पानी गर्म हो जाता है. 40 डिग्री से लेकर 48 डिग्री तक पहुंचे तापमान के बीच तालाब का पानी खौलने जैसा हो जाता है.
जबकि फिशरीज एक्सपर्ट के मुताबिक मछलियों के तालाब में पानी का तापमान 31 डिग्री से ऊपर नहीं होना चाहिए. इससे ज्यादा तापमान वाला पानी मछलियों के लिए जानलेवा हो जाता है. और अप्रैल से लेकर जून तक देश के बहुत सारे राज्यों में तापमान 38 से लेकर 488 डिग्री तक पहुंच जाता है. कुछ जगहों पर तो 49 और 50 डिग्री को भी छू जाता है. और पानी तेज गर्म होने के चलते उसमे ऑक्सींजन की मात्रा भी कम हो जाती है.
फिशरीज एक्सपर्ट डॉ. एमके खान का कहना है कि तालाब में ज्यादातर रोहू, कतला, मृंगाल मछली का पालन किया जाता है. गर्मी के इस मौसम में मछलियों को 26 से 31 डिग्री तापमान वाले पानी की जरूरत होती है. लेकिन अभी तापमान भी बढ़ रहा है. 40 से 42 डिग्री तक तापमान पहुंच रहा है. यह मछलियों के लिए बहुत ही खतरनाक होता है. जब गर्म हवाएं चलती हैं तो हालात और भी खराब हो जाते हैं. होता ये है कि तालाब में फाइटो क्लाइंजम (अल्गी) लगी होती है. पानी के अंदर इसी से झींगा को मुख्य रूप से ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन तेज गर्मी और गर्म पानी के चलते यह मुरझा जाती है. अब क्योंकि मछली पालन के लिए बिजली कमर्शियल होने के चलते बहुत महंगी है तो मछली पालक तालाब में पंखे और इरेटर बहुत कम चलाते हैं.
एमके खान का कहना है कि मौजूदा और आने वाले मौसम को देखते हुए तालाब के पानी को ठंडा रखने के लिए ये जरूरी है कि खासतौर पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक पंखे और इरेटर चलाएं. गर्मियों में सूखा खाने को न दें. एक लीटर मीठे फ्रेश पानी में 100 ग्राम गुड़ घोलकर, दो से तीन ग्राम विटामिन सी घोलकर दें. ग्लूकोज पाउडर भी खोलकर पिलाया जा सकता है. मछलियों को दी जाने वाली दोपहर की खुराक एकदम कम कर दें. 10 फीसद से ज्यादा खाने को न दें. सुबह-शाम और रात 30-30 फीसद तक खाने को दें. तालाब के पानी की हाईट बढ़ा दें. अगर तालाब में 3.5 फुट पानी है तो उसे पांच से 5.5 फुट कर दें. क्योंकि ऊपर का पानी गर्म भी हो जाएगा तो 3.5 फुट पानी की सतह सामान्य बनी रहेगी.
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