उत्तर प्रदेश में देसी गाय के गोबर खाद की बढ़ी तेजी से मांग, 6 हजार रुपये प्रति टन पहुंचा रेट, जानें फायदे

उत्तर प्रदेश में देसी गाय के गोबर खाद की बढ़ी तेजी से मांग, 6 हजार रुपये प्रति टन पहुंचा रेट, जानें फायदे

UP News: श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक,उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं. यह पहल गांवों में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रही है. उन्होंने बताया कि अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है. 

cow dung organic manure demand rising in uttar pradesh price reaches 6 thousand rupees per tonयूपी में गो संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार cow dung organic manure demand rising in uttar pradesh price reaches 6 thousand rupees per tonयूपी में गो संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार
क‍िसान तक
  • LUCKNOW,
  • May 25, 2026,
  • Updated May 25, 2026, 7:36 AM IST

उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर विकास का मजबूत मॉडल बनाया गया है. यही वजह है कि देसी गाय के गोबर की मांग मार्केट में तेजी से बढ़ती जा रही है. उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि गोबर को अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और रोजगार के संसाधन के रूप में विकसित किया गया है. प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है.

रासायनिक खाद की लागत में 40 प्रतिशत तक कमी

उन्होंने बताया कि जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है. वहीं प्राकृतिक खेती से 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं. जिससे रासायनिक खाद की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है.

7700 से अधिक गोशालाओं में 12 लाख निराश्रित गोवंश

श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक,उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं. यह पहल गांवों में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रही है. उन्होंने बताया कि अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है. इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है. इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी लाभ मिल रहा है. 

महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला नया रास्ता

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़ चुके हैं. इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है. गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है.

गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट

इसके अलावा उन्नाव में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रहीं हैं. यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित है. पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है.

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